दिल्ली एम्स में 13 महीनों में हुई एक हजार से ज्यादा रोबोटिक सर्जरी

दिल्ली एम्स में 13 महीनों में 1,000 से ज्यादा रोबोटिक सर्जरी की गईं।

Update: 2026-01-21 06:15 GMT

नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली ने बीते 13 महीनों में 1,000 से अधिक रोबोटिक सर्जरी कर एक अहम उपलब्धि हासिल की है। यह जानकारी मंगलवार को एम्स की ओर से साझा की गई।

एम्स के सर्जरी विभाग में एक वर्ष से अधिक समय पहले रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत जटिल ऑपरेशनों को अधिक सटीक और सुरक्षित ढंग से करने के उद्देश्य से की गई थी। संस्थान के अनुसार, अत्याधुनिक सर्जिकल रोबोट की मदद से अब तक पैंक्रियाटिक ड्यूओडेनेक्टॉमी, गैस्ट्रेक्टोमी, एसोफेगेक्टॉमी, कोलेक्टॉमी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर के लिए एंटीरियर रिसेक्शन, किडनी ट्रांसप्लांटेशन और थायरॉइड, पैराथायरॉइड, एड्रेनल व पैंक्रियास के मिनिमली इनवेसिव ऑपरेशन किए जा चुके हैं।

जहां पिछले एक दशक में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों के निजी अस्पतालों में यूरोलॉजी और गायनेकोलॉजी में रोबोटिक सर्जरी का उपयोग बढ़ा है, वहीं सरकारी अस्पतालों में इसका प्रचलन सीमित रहा है। एम्स इस कमी को दूर करते हुए पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम में एडवांस्ड रोबोटिक तकनीक को शामिल कर रहा है, ताकि हर वर्ग के मरीजों को इसका लाभ मिल सके।

सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सुनील चुंबर ने बताया कि एम्स एक शैक्षणिक संस्थान है, जहां 100 से अधिक सर्जिकल रेजिडेंट प्रशिक्षण ले रहे हैं। रोबोटिक सिस्टम की स्थापना से रेजिडेंट डॉक्टरों को आधुनिक तकनीक पर प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा, जिससे एम्स का ट्रेनिंग करिकुलम वैश्विक स्तर के मेडिकल संस्थानों के बराबर हो गया है।

उन्होंने कहा कि रोबोटिक सर्जरी से कम रक्तस्राव, अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहना और मरीजों का तेजी से स्वस्थ होना जैसे कई फायदे मिलते हैं।

वहीं, सर्जरी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. मोहित जोशी ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी नई और उन्नत तकनीक है, और देश का शीर्ष संस्थान होने के नाते एम्स हमेशा चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने में अग्रणी रहा है। उन्होंने बताया कि विभाग के अधिकांश सर्जन रोबोटिक सर्जरी में प्रशिक्षित हैं और इसके लिए एक समर्पित ऑपरेशन थिएटर भी उपलब्ध है। (With inputs from IANS)

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