निपाह वायरस: भारत के लिए एक घातक खतरा, जानें क्यों है यह इतना जानलेवा

निपाह वायरस भारत के लिए एक घातक खतरा बनता दिखाई दे रहा है.

Update: 2026-01-28 16:56 GMT

भारत में जब हम खतरनाक बीमारियों की बात करते हैं, तो डेंगू, मलेरिया और कोविड का नाम सबसे पहले आता है, लेकिन 'निपाह वायरस' (Nipah Virus) एक ऐसा नाम है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. ताज्जुब की बात यह है कि निपाह दुनिया के सबसे घातक वायरसों में से एक है और यह भारत में कई बार अपना कहर बरपा चुका है.

क्या है निपाह वायरस और यह कैसे फैलता है?

निपाह एक ज़ूनोटिक वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है. इसके मुख्य वाहक 'फ्रूट बैट्स' (Fruit Bats) यानी फल खाने वाले चमगादड़ हैं.

चमगादड़ की लार, मूत्र या उनके द्वारा जूठे किए गए फलों से यह संक्रमण फैलता है. कच्चे खजूर के रस (Date Palm Sap) का सेवन करना भारत और बांग्लादेश में इसके संक्रमण का एक बड़ा कारण रहा है. संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आने से भी यह तेजी से फैल सकता है. हाल ही में पश्चिम बंगाल में संक्रमण के मामलों के बाद थाईलैंड और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों ने हवाई अड्डों पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग और जांच सख्त कर दी है.

मस्तिष्क पर निपाह का घातक हमला

सीके बिड़ला हॉस्पिटल (CMRI) के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. दीप दास के अनुसार, निपाह वायरस की सबसे खतरनाक विशेषता यह है कि यह शरीर की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) में सूजन पैदा करता है  "यह सूजन वायरस को 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' पार करने और सीधे मस्तिष्क तक पहुंचने में मदद करती है. इससे मस्तिष्क में गंभीर सूजन आ जाती है, जिसे एन्सेफलाइटिस (Encephalitis) कहा जाता है."

निपाह के लक्षण बहुत तेजी से बदलते हैं

शुरुआती लक्षण में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और सांस लेने में तकलीफ. मानसिक भ्रम (Confusion), सुस्ती, दौरे पड़ना और बेहोशी. मस्तिष्क में सूजन के कारण शरीर सांस लेने और हृदय गति जैसे महत्वपूर्ण कार्यों पर नियंत्रण खो देता है, जिससे मृत्यु का जोखिम बहुत बढ़ जाता है.

बचाव ही एकमात्र रास्ता

इसकी मृत्यु दर बहुत अधिक है, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है. डॉ. दीप दास सलाह देते हैं कि जमीन पर गिरे हुए या पक्षियों द्वारा कुतरे गए फलों को बिल्कुल न खाएं. कच्चे खजूर के रस के सेवन से बचें. अगर लक्षण दिखें, तो तुरंत अस्पताल जाएं और मरीज को आइसोलेशन में रखें.

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