निपाह वायरस क्या है? जानें इसके लक्षण, फैलने के कारण और बचाव के उपाय

निपाह वायरस (Nipah Virus) को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है. जानिए इस वायरस के बारे में.

Update: 2026-01-27 06:45 GMT

निपाह वायरस (Nipah Virus) एक बेहद गंभीर और जानलेवा संक्रमण है. हाल के वर्षों में भारत के कुछ राज्यों, विशेषकर केरल और पश्चिम बंगाल में इसके प्रकोप ने गहरी चिंता पैदा की है. यह एक जूनोटिक वायरस (Zoonotic Virus) है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इसकी मृत्यु दर 40 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक हो सकती है, जो इसे कोरोना जैसे वायरस से भी अधिक घातक बनाती है.

निपाह वायरस क्या है?

निपाह वायरस (NiV) का मुख्य स्रोत'फ्रूट बैट्स' (Fruit Bats) या फल खाने वाले चमगादड़ हैं, जिन्हें 'फ्लाइंग फॉक्स' भी कहा जाता है. यह वायरस इन चमगादड़ों के लार, मूत्र और मल में पाया जाता है. यह संक्रमण मुख्य रूप से तीन तरीकों से फैलता है.चमगादड़ों द्वारा जूठे किए गए फलों (जैसे खजूर या गिरे हुए फल) को खाने से. संक्रमित सूअरों या अन्य पशुओं के संपर्क में आने से. संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थ (जैसे लार या रक्त) के सीधे संपर्क में आने से।

निपाह वायरस के लक्षण (Symptoms)

निपाह वायरस के लक्षण संक्रमण के 4 से 14 दिनों के भीतर दिखने लगते हैं. इसके लक्षण सामान्य फ्लू से लेकर गंभीर दिमागी सूजन तक हो सकते हैं. तेज बुखार, लगातार सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और गले में खराश. खांसी और सांस लेने में गंभीर कठिनाई. चक्कर आना, अत्यधिक उनींदापन और मानसिक भ्रम (Confusion). गंभीर मामलों में मस्तिष्क में सूजन आ जाती है, जिससे दौरे (Seizures) पड़ सकते हैं और मरीज 24-48 घंटों के भीतर कोमा में जा सकता है.

बचाव और सावधानी

फिलहाल में निपाह वायरस का कोई सटीक टीका (Vaccine) उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है. पेड़ से गिरे हुए या जानवरों द्वारा कुतरे गए फलों को बिल्कुल न खाएं. कच्चे खजूर का रस पीने से बचें. बीमार जानवरों (विशेषकर सूअर और चमगादड़) के संपर्क में आने से बचें. संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करते समय मास्क और दस्तानों का इस्तेमाल करें. नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोएं. किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संर्पक जरूर करें.

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