निपाह वायरस: क्या भारत से दुनिया को है खतरा? जानें WHO की रिपोर्ट और बचाव के तरीके
Nipah virus: निपाह वायरस को लेकर WHO की रिपोर्ट सामने आई है. जानिए क्या कहती है ये रिपोर्ट.
हाल ही में भारत के पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस (Nipah Virus) के दो मामले सामने आने के बाद एशियाई देशों में हड़कंप मच गया है. हांगकांग, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों ने अपने हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग सख्त कर दी है. इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है.
WHO की रिपोर्ट: भारत में जोखिम कम
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने रायटर्स को दिए एक ईमेल में कहा कि भारत से इस घातक वायरस के फैलने का जोखिम फिलहाल 'कम' है. संगठन ने स्पष्ट किया कि भारत में इस तरह के प्रकोप को रोकने की पूरी क्षमता है और फिलहाल 'इंसान से इंसान' (Human to Human) में संक्रमण बढ़ने के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं. WHO ने यात्रा या व्यापार पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध की सिफारिश नहीं की है, जो भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर है.
कितना खतरनाक है निपाह वायरस?
- निपाह वायरस को WHO ने 'प्रायोरिटी पैथोजन' (Priority Pathogen) की कैटगरी में रखा है.
- इस वायरस की मृत्यु दर 40 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक है, जो इसे बेहद जानलेवा बनाती है.
- फिलहाल इस वायरस का कोई सटीक इलाज या लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, हालांकि कुछ टीकों का परीक्षण चल रहा है.
- यह वायरस तेज बुखार के साथ-साथ मस्तिष्क में सूजन (Encephalitis) पैदा कर सकता है.
कैसे फैलता है संक्रमण?
यह वायरस मुख्य रूप से फ्रूट बैट्स (फल खाने वाले चमगादड़) और सूअरों जैसे जानवरों के जरिए इंसानों में पहुंचता है. इंसान तब संक्रमित होते हैं जब वे चमगादड़ों द्वारा दूषित किए गए फल खाते हैं या उनके मल-मूत्र के संपर्क में आते हैं. हालांकि, इंसान से इंसान में यह तभी फैलता है जब कोई लंबे समय तक संक्रमित व्यक्ति के बेहद करीबी संपर्क में रहे.
भारत के लिए नया नहीं है निपाह
भारत में निपाह का इतिहास पुराना है. दिसंबर के अंत में पश्चिम बंगाल में दो स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित पाए गए, जिनका फिलहाल इलाज चल रहा है। इससे पहले केरल में 2018 से अब तक कई छोटे प्रकोप देखे जा चुके हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि केरल और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्से इस वायरस के लिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्र हैं क्योंकि यहां चमगादड़ों की आबादी में यह वायरस प्राकृतिक रूप से मौजूद है.