AIIMS दिल्ली में PESICON 2026 का सफल समापन, भारत बना रोबोटिक पीडियाट्रिक सर्जरी का ग्लोबल हब
एम्स नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में भारत सहित 300 से अधिक दिग्गज सर्जनों ने हिस्सा लिया.
भारतीय चिकित्सा जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में,एम्स (AIIMS), नई दिल्ली के बाल चिकित्सा सर्जरी विभाग ने PESICON 2026 (21वां वार्षिक सम्मेलन) का सफलतापूर्वक समापन किया. 21 से 23 जनवरी 2026 तक चले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने भारत को वैश्विक स्तर पर उन्नत पीडियाट्रिक सर्जिकल ट्रेनिंग के केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है. एम्स नई दिल्ली के निदेशक प्रो. एम. श्रीनिवास के मार्गदर्शन में आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत सहित पोलैंड, मिस्र, ओमान और बहरीन के 300 से अधिक दिग्गज सर्जनों ने हिस्सा लिया. इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बाल चिकित्सा (Pediatric) के क्षेत्र में कम चीर-फाड़ वाली (Minimally Invasive) और रोबोटिक सर्जरी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना था.
सर्जिकल शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव
PESICON 2026 ने पारंपरिक लेक्चर आधारित शिक्षा के बजाय 'हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग' (व्यावहारिक प्रशिक्षण) पर ध्यान केंद्रित किया. इसके तहत पांच प्रमुख कार्यशालाएं आयोजित की गईं. सर्जनों को डिजिटल ज्ञान साझा करने के लिए मल्टीमीडिया कौशल सिखाना.युवा सर्जनों को आधुनिक रोबोटिक प्रणालियों पर सटीक टांके लगाने का अभ्यास कराना. बिना किसी मरीज के जोखिम के जटिल ऑपरेशनों का बार-बार अभ्यास.अगली पीढ़ी की सर्जिकल तकनीक और सुरक्षा प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण.
भारत में पहली बार: दो बड़ी नवाचार (Innovations)
PESICON 2026 ने दो ऐसी तकनीकें पेश कीं जो देश में सर्जिकल शिक्षा की तस्वीर बदल देंगी. यह एक ऐसी सुविधा है जहां सर्जन वास्तविक ऊतकों (Tissue) पर जटिल सर्जरी का अभ्यास कर सकते हैं. प्रो. प्रबुद्ध गोयल के अनुसार, यह लैब सिमुलेशन और वास्तविक ऑपरेशन के बीच के अंतर को कम करती है.
सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि 'दा विंची' स्टाइल रोबोटिक तकनीक से लैस एक मोबाइल बस है. प्रो. अंजन कुमार धुआ ने बताया कि यह बस टीयर-2 और टीयर-3 शहरों के सर्जनों तक आधुनिक तकनीक पहुँचाएगी, जिससे भौगोलिक दूरियां खत्म होंगी.
दूरदर्शी नेतृत्व और भविष्य की राह
विभागाध्यक्ष प्रो. संदीप अग्रवाल और मुख्य आयोजन सचिव प्रो. विशेष जैन के नेतृत्व में इस कार्यक्रम ने भारतीय सर्जिकल शिक्षा के लिए नए मानक स्थापित किए हैं। डॉ. अंकुर मंडेलिया और डॉ. वीवीएस चंद्रशेखरम ने कहा कि इस मॉडल से सर्जन केवल ज्ञान लेकर नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल लेकर जा रहे हैं.