कंसीव करने में इम्यून सिस्टम की भूमिका, क्या केवल हार्मोन ही काफी नहीं हैं? जानें क्या कहती है नई रिसर्च
फर्टिलिटी और गर्भधारण (Conception) की बात हार्मोन इंबैलेंस से जुड़ी होती है.
आमतौर पर फर्टिलिटी और गर्भधारण (Conception) की बात होने पर सारा ध्यान हार्मोन, ओव्यूलेशन और भ्रूण (Embryo) की क्वालिटी पर होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अच्छी क्वालिटी के भ्रूण के बावजूद कुछ मामलों में 'इम्प्लांटेशन' (भ्रूण का गर्भाशय से जुड़ना) क्यों फेल हो जाता है? नई वैज्ञानिक रिसर्च बताती है कि सफल गर्भधारण के पीछे हमारे इम्यून सिस्टम (Immune System) का बहुत बड़ा हाथ होता है.
इम्प्लांटेशन के लिए सही माहौल तैयार करना
गर्भधारण के बाद, भ्रूण गर्भाशय की ओर यात्रा करता है. गर्भाशय की परत (Uterine lining) में भ्रूण के जुड़ने के लिए एक छोटा सा समय होता है जिसे 'विंडो ऑफ इम्प्लांटेशन'कहा जाता है. रिसर्च के अनुसार, इस दौरान गर्भाशय में एक नियंत्रित इन्फ्लेमेटरी रिस्पॉन्स (सूजन की प्रतिक्रिया) होती है. हालांकि सूजन को अक्सर बुरा माना जाता है, लेकिन यहां यह जरूरी है क्योंकि यह गर्भाशय के ऊतकों को भ्रूण के स्वागत के लिए तैयार करती है.
इम्यून सेल्स का अहम रोल
गर्भाशय में कई विशेष कोशिकाएं सक्रिय होती हैं. यूटेराइन नेचुरल किलर सेल्स (uNK Cells):-ये कोशिकाएं भ्रूण को नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि प्लेसेंटा (Placenta) के विकास और रक्त वाहिकाओं को सही आकार देने में मदद करती हैं.
मैक्रोफेज और डेंड्रिटिक सेल्स: ये संक्रमण से बचाते हैं और ऊतकों की मरम्मत करते हैं. रेगुलेटरी T सेल्स: ये सबसे जरूरी हैं, क्योंकि भ्रूण में पिता के जेनेटिक गुण भी होते हैं, इसलिए शरीर उसे 'बाहरी वस्तु' मानकर हमला कर सकता है. T सेल्स इस हमले को रोकती हैं और शरीर को भ्रूण स्वीकार करने के लिए प्रेरित करती हैं.
इम्यून बैलेंस क्यों है जरूरी?
सफल प्रेगनेंसी बैलेंस पर निर्भर करती है, अगर इम्यून सिस्टम कम एक्टिव है, तो गर्भाशय भ्रूण को स्वीकार नहीं करेगा. बहुत ज्यादा एक्टिव:अगर इन्फ्लेमेशन (सूजन) बहुत अधिक है, तो यह इम्प्लांटेशन को विफल कर सकता है या प्री-एक्लेम्पसिया और बार-बार गर्भपात (Recurrent Pregnancy Loss) जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है.
फर्टिलिटी केयर के लिए नया नजरिया
यह समझ उन दंपत्तियों के लिए उम्मीद की किरण है जो 'अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी' (अस्पष्ट बांझपन) का सामना कर रहे हैं. अब डॉक्टर केवल हार्मोन ही नहीं, बल्कि मरीज के इम्यून प्रोफाइल को भी समझने की कोशिश कर रहे हैं. इम्प्लांटेशन को केवल एक मैकेनिकल प्रक्रिया के बजाय एक जटिल जैविक संतुलन के रूप में देखना फर्टिलिटी इलाज को अधिक प्रभावी बना सकता है.
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