H5N1 वायरस (बर्ड फ्लू) क्या है? लक्षण, प्रसार और बचाव के तरीके

H5N1 वायरस संक्रामक और घातक वायरस है, जिसे आमतौर पर'एवियन इन्फ्लूएंजा' (Avian Influenza) या 'बर्ड फ्लू' के नाम से जाना जाता है.

Update: 2026-02-07 06:45 GMT

इन दिनों चेन्नई में मरे हुए कौवो में पाए गए H5N1 वायरस के बाद राज्य सरकार ने एडवाइजरी जारी की है. लेकिन ये वायरल फैलता कैसे है? जानिए H5N1 वायरस के फैलने से लेकर बचाव तक की पूरी जानकारी. H5N1 वायरस संक्रामक और घातक वायरस है, जिसे आमतौर पर'एवियन इन्फ्लूएंजा' (Avian Influenza) या 'बर्ड फ्लू' के नाम से जाना जाता है. यह मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में यह इंसानों और अन्य जानवरों में भी फैल सकता है.

H5N1 वायरस क्या है?

H5N1 इन्फ्लूएंजा टाइप 'A' वायरस का एक उप-प्रकार है. यह वायरस जंगली जलपक्षियों (जैसे बत्तख और गीज़) में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है.हालांकि जंगली पक्षी अक्सर इससे बीमार नहीं होते, लेकिन जब यह वायरस पालतू पक्षियों जैसे मुर्गियों और बत्तखों में फैलता है, तो यह उनके लिए अत्यंत जानलेवा साबित होता है.

यह कैसे फैलता है? (Transmission)

पक्षियों के बीच यह वायरस उनके लार, नाक के स्राव और मल के संपर्क में आने से फैलता है. इंसानों में इसके फैलने के मुख्य कारण हैं, जैसे संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आना- जीवित या मरे हुए संक्रमित पक्षियों को छूने से.उन जगहों पर जाने से जहाँ पक्षियों का मल या पंख बिखरे हों. संक्रमित पक्षी का कच्चा या ठीक से न पका हुआ मांस और अंडे खाने से.मानव-से-मानव प्रसार-यह बहुत दुर्लभ है, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीब रहने से इसकी संभावना हो सकती है.

इंसानों में बर्ड फ्लू के लक्षण

H5N1 संक्रमण के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं, लेकिन ये बहुत तेजी से गंभीर रूप ले सकते हैं.

  • तेज बुखार और कफ.
  • गले में खराश और मांसपेशियों में दर्द.
  • सांस लेने में भारी तकलीफ (Shortness of breath)।
  • पेट दर्द, दस्त और उल्टी.
  • गंभीर मामलों में यह निमोनिया या एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) का कारण बन सकता है.

बचाव के उपाय (Prevention)

बर्ड फ्लू से बचने के लिए सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है. पक्षियों के संपर्क में आने के बाद हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं.मांस और अंडों को कम से कम 70°C के तापमान पर अच्छी तरह पकाकर ही खाएं. पका हुआ मांस खाते समय लालिमा नहीं दिखनी चाहिए. अगर आप अपने आस-पास किसी पक्षी को मृत देखते हैं, तो उसे छुएं नहीं और तुरंत स्थानीय पशुपालन विभाग को सूचित करें. मुर्गी पालन केंद्रों (Poultry farms) या पक्षी बाजारों में जाते समय मास्क और दस्ताने पहनें.

Tags:    

Similar News