फिटनेस के बावजूद युवाओं की अचानक मौत क्यों? AIIMS-ICMR रिपोर्ट में खुलासा
AIIMS-ICMR की रिपोर्ट में फिट दिखने वाले युवाओं की अचानक मौत के पीछे छिपे संभावित कारणों और जोखिमों पर रोशनी डाली गई है।
फिट दिखने के बावजूद युवाओं में बढ़ती अचानक मौतें, एक गंभीर स्वास्थ्य चेतावनी।
हाल के सालों में युवाओं की अचानक हो रही मौतों ने पूरे देश में चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। जिम में एक्सरसाइज करते समय, सफर के दौरान, घर पर या नींद में अचानक गिरकर जान चले जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अब AIIMS और ICMR की एक नई स्टडी ने इन मामलों के पीछे छिपी मेडिकल और वैज्ञानिक हकीकत को समझाने की कोशिश की है।
मेडिकल शब्दों में “अचानक मौत” का मतलब होता है—
या तो लक्षण शुरू होने के एक घंटे के भीतर मृत्यु हो जाना,
या फिर व्यक्ति को आखिरी बार जीवित देखे जाने के 24 घंटे के भीतर मौत होना।
डॉक्टरों के अनुसार, 20 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में इस तरह की मौतों के मामले तेजी से बढ़े हैं।
AIIMS-ICMR स्टडी के अहम निष्कर्ष
AIIMS दिल्ली में मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच हुई 2,214 मेडिको-लीगल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स का विश्लेषण किया गया। यह ICMR के एक बड़े शोध का हिस्सा था, जिसमें सभी मामलों को शामिल किया गया, किसी का चयन नहीं किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, 180 मौतें (करीब 8.1%) अचानक मौत की श्रेणी में आईं। इनमें से:
57.2% मौतें 18 से 45 वर्ष के युवाओं में हुईं
ज्यादातर लोग बाहर से पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देते थे
पुरुषों में यह जोखिम महिलाओं की तुलना में ज्यादा पाया गया
दिल की बीमारी सबसे बड़ा कारण
स्टडी में सामने आया कि 42.6% अचानक मौतों की वजह हृदय से जुड़ी समस्याएं थीं। कई युवाओं की हृदय धमनियों में 70% से ज्यादा ब्लॉकेज पाया गया, जो बेहद गंभीर स्थिति मानी जाती है।
सबसे ज्यादा असर Left Anterior Descending (LAD) आर्टरी पर देखा गया, जिसे मेडिकल भाषा में “विधवा बनाने वाली धमनी” कहा जाता है। इससे साफ होता है कि गंभीर हार्ट डिजीज बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी मौजूद हो सकती है।
जब पोस्टमॉर्टम भी वजह नहीं बता सका
करीब 21.3% मामलों में पूरी जांच के बावजूद मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आ पाया। डॉक्टरों का मानना है कि ऐसे मामलों में जेनेटिक हार्ट रिदम डिसऑर्डर जिम्मेदार हो सकते हैं, जिनमें दिल की बनावट सामान्य दिखती है। ऐसे जोखिमों से बचाव के लिए जेनेटिक टेस्ट और परिवार की स्क्रीनिंग जरूरी हो सकती है।
सिर्फ दिल ही नहीं, अन्य कारण भी जिम्मेदार
रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि:
21.3% मौतें सांस से जुड़ी बीमारियों जैसे निमोनिया और टीबी के कारण हुईं
अत्यधिक शराब पीने वालों में नींद के दौरान उल्टी से दम घुटने के मामले भी सामने आए
कोविड या वैक्सीन से कोई संबंध नहीं
अध्ययन ने साफ किया कि अचानक मौतों का न तो कोविड संक्रमण से और न ही कोविड वैक्सीनेशन से कोई सीधा संबंध पाया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि युवाओं को भी नियमित रूप से दिल की जांच करानी चाहिए, तंबाकू और शराब से दूरी बनानी चाहिए और यह समझना जरूरी है कि “फिट दिखना” दिल के पूरी तरह स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है। यह अध्ययन डर फैलाने के बजाय जागरूकता बढ़ाने का संदेश देता है—क्योंकि समय रहते पहचान होने पर कई जानें बचाई जा सकती हैं।