सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस से परेशान? गर्दन दर्द और अकड़न दूर करने में कारगर योगासन
सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में गर्दन की दर्द और अकड़न कम करने के लिए योगासन मददगार हैं।
नई दिल्ली: सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस एक ऐसी स्थिति है जो आमतौर पर उम्र बढ़ने, गलत बैठने या खड़े होने की आदत, लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल, चोट या रीढ़ की डिस्क के घिसने के कारण होती है। इस स्थिति में गर्दन की हड्डियों और डिस्क पर असर पड़ता है, जिससे गर्दन में दर्द और अकड़न, कंधों और हाथों में झुनझुनी, सिरदर्द, चक्कर और कभी-कभी कमजोरी महसूस हो सकती है। योगासन इन समस्याओं को कम करने में मदद कर सकते हैं।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, नियमित योगाभ्यास से गर्दन की मांसपेशियां मजबूत और लचीली बनती हैं, रक्त संचार बेहतर होता है और दर्द एवं तनाव में राहत मिलती है। योग दवाओं का पूरक विकल्प बनकर समस्या को प्राकृतिक तरीके से नियंत्रित करने में मदद करता है।
सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस के लिए सुझाए गए योगासन और प्राणायाम में ग्रीवा शक्ति विकासक (गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाने वाला), स्कंध और बाहुमूल शक्ति विकासक (कंधों और गर्दन के जोड़ों को मजबूत करने वाला), ताड़ासन (रीढ़ सीधी करने और मुद्रा सुधारने वाला), मार्जरी आसन, गोमुखासन (रीढ़, गर्दन और पीठ की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने वाला), सरल भुजंगासन (गर्दन और ऊपरी पीठ मजबूत करने वाला), मकरासन, नाड़ी शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम और योग निद्रा शामिल हैं। ये सभी आसन दर्द और अकड़न कम करने, मांसपेशियों को मजबूत करने और पूरे शरीर को रिलैक्स करने में मदद करते हैं।
इन आसनों को नियमित दिनचर्या में शामिल करने से मानसिक शांति मिलती है, गर्दन का तनाव कम होता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं, डिस्क पर दबाव घटता है और रक्त प्रवाह बेहतर होने से सूजन और दर्द में कमी आती है। नियमित अभ्यास से शरीर को कई अन्य लाभ भी मिलते हैं।
हालांकि, योग सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस का पूर्ण इलाज नहीं है। इसलिए इसे करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। खासकर यदि दर्द ज्यादा हो या सर्जरी हुई हो। आसनों को धीरे-धीरे और बिना जोर लगाए करें, गर्दन को अधिक झुकाने या घुमाने से बचें। गर्भावस्था, उच्च रक्तचाप या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में विशेष सावधानी बरतें। (With inputs from IANS)