भारत में नवजात शिशुओं के लिए टीकाकरण एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य प्रक्रिया है, जो बच्चों को विभिन्न संक्रामक रोगों से बचाने के लिए किया जाता है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत नवजात शिशुओं को समय-समय पर टीके लगाए जाते हैं। यह कार्यक्रम बच्चों की सुरक्षा और समाज में रोगों के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

टीकाकरण का महत्व

नवजात शिशु बहुत ही नाजुक अवस्था में होते हैं, और वे संक्रामक रोगों के प्रति संवेदनशील रहते हैं। इन रोगों में पोलियो, खसरा, टीबी, डिप्थीरिया, हिपेटाइटिस बी और बुखार जैसी बीमारियां शामिल हैं। इन रोगों से बचाव के लिए विभिन्न प्रकार के टीके लगाए जाते हैं, जो नवजात शिशु को बीमारियों से सुरक्षित रखते हैं और उनका जीवन बचाते हैं।

टीकाकरण कार्यक्रम

भारत में नवजात शिशुओं के लिए प्रमुख टीके निम्नलिखित हैं:

1. BCG (बेसिलस कैलमेट - गुएरिन): यह टीका तपेदिक (टीबी) से बचाव करता है।

2. Hepatitis B: यह हेपेटाइटिस बी वायरस से बचाव करता है।

3. Polio: पोलियो से बचाव के लिए यह टीका नवजातों को दिया जाता है।

4. DTP (डिप्थीरिया, टिटनस, और पर्टुसिस): यह टीका डिप्थीरिया, टिटनस और खांसी के साथ जुड़े अन्य रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है।

5. Measles (खसरा): यह खसरा जैसी खतरनाक बीमारी से बचाव करता है।

6. Rotavirus: यह रोटावायरस से होने वाली दस्त की समस्या से बचाव करता है।

नवजात शिशु के लिए टीकाकरण की प्रक्रिया

नवजात शिशु का टीकाकरण पहले कुछ दिनों से ही शुरू कर दिया जाता है। पहले छह महीने में, कई टीके जैसे कि पोलियो, BCG, और DTP लगाए जाते हैं। फिर, इसके बाद के टीके निर्धारित आयु के अनुसार समय-समय पर लगाए जाते हैं।

निष्कर्ष

नवजात शिशुओं के लिए अनिवार्य टीकाकरण स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा है। यह ना केवल शिशु के जीवन की रक्षा करता है, बल्कि समाज में महामारी फैलने से भी रोकता है। इसलिए, सभी माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका बच्चा सभी अनिवार्य टीकों का समय पर टीकाकरण करवाए, ताकि वह सुरक्षित रहे और स्वस्थ जीवन जी सके।

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Dr Shehla Kazi
Dr Shehla Kazi

Dr Shehla Kazi (MBBS, DCH, Fellowship in Neonatology) is a Consultant Paediatrician & Neonatologist at Jaslok Hospital & Research Centre. She has over eight years of experience in Neonatology, managing extreme preterm babies, high-risk follow-ups, and critical paediatric cases. She provides critical care and high-risk services and has handled both outpatient (OPD) and inpatient (IPD) paediatric cases.