कम उम्र में बढ़ता हाई ब्लड प्रेशर, युवाओं की सेहत के लिए बन रहा बड़ा खतरा

कम उम्र में उच्च रक्तचाप युवाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

Update: 2026-02-25 07:00 GMT

नई दिल्ली: पहले हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) की चिंता आमतौर पर 40 साल के बाद होती थी, लेकिन आज की तेज और अनियमित जीवनशैली के चलते 20 से 30 साल की उम्र के युवा भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। यह समस्या अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। जब तक व्यक्ति को इसका पता चलता है, तब तक दिल, दिमाग और किडनी पर असर शुरू हो चुका होता है।

युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बदलती लाइफस्टाइल है। पहले की तुलना में शारीरिक मेहनत काफी कम हो गई है। लंबे समय तक लैपटॉप या मोबाइल के सामने बैठना, देर रात तक जागना और सुबह जल्दी काम पर निकलना शरीर को थका देता है। नींद की कमी से शरीर का संतुलन बिगड़ता है और इसका सीधा असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है।

खाने की आदतें भी जिम्मेदार हैं। जंक फूड, पैकेट वाले भोजन और अत्यधिक नमक शरीर में पानी और फैट जमा कर नसों पर दबाव बढ़ाते हैं। तनाव भी उच्च रक्तचाप का बड़ा कारण है। पढ़ाई, नौकरी और भविष्य की चिंता लगातार शरीर में ऐसे हार्मोन उत्पन्न करती है जो नसों को सिकोड़ देते हैं, जिससे खून को बहने में अधिक ताकत लगती है और ब्लड प्रेशर बढ़ता है। आयुर्वेद भी मानता है कि मानसिक अशांति से शरीर में बीमारियाँ पैदा होती हैं, और हाई बीपी इसका सटीक उदाहरण है।

मोटापा, धूम्रपान और शराब की आदतें भी रक्तचाप बढ़ाने में योगदान करती हैं। अधिक वजन होने पर दिल को खून पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे ब्लड प्रेशर में वृद्धि होती है। यदि परिवार में पहले से उच्च रक्तचाप की समस्या रही हो, तो जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत अनदेखा नहीं करने चाहिए। सुबह उठते ही सिर भारी लगना, अचानक थकान, धुंधली दृष्टि, घबराहट या कभी-कभी नाक से खून आना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह दिल की बीमारियाँ, स्ट्रोक, किडनी की खराबी, आंखों की रोशनी में कमी और मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर असर डाल सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए कुछ आदतें अपनाना लाभकारी है। ताजे फल, सब्जियां, दाल और साबुत अनाज को आहार में शामिल करें। अत्यधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएँ। रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम या चलने की आदत डालें। योगाभ्यास करें, 7 से 9 घंटे की पर्याप्त नींद लें और मोबाइल या स्क्रीन से दूरी बनाएं। धूम्रपान और शराब का सेवन सीमित करना भी जरूरी है। (With inputs from IANS)

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