ये होते हैं फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण- नोट कर लें, डॉक्‍टर से जानें बचाव के तरीके

लंग कैंसर यानी फेफड़ों का कैंसर दुनिया में तेजी से फैल रही जानलेवा बीमारियों में से एक है।

Update: 2026-03-23 12:18 GMT

लंग कैंसर यानी फेफड़ों का कैंसर दुनिया में तेजी से फैल रही जानलेवा बीमारियों में से एक है। पिछले कुछ समय में महानगरों में तेजी से बढ़ते प्रदूषण के स्‍तर के कारण इस बीमारी के होने का जोखिम भी बढ़ा है। लंग कैंसर तब होता है, जब फेफड़ों में कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह बीमारी पुरुष या महिला, किसी को भी हो सकती है और किसी भी उम्र में हो सकती है। डॉक्‍टर्स कहते हैं कि सही समय पर इस बीमारी के बारे में पता चल जाए तो बचाव संभव है। इसके लिए आवश्‍यक है कि इसके शुरुआती लक्षणों के बारे में जाना जाए। 

लंग कैंसर क्या होता है 

यह कैंसर तब होता है जब फेफड़ों में असामान्य सेल्स अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगते हैं। धूम्रपान करने वाले लोग इसकी जद में सबसे अधिक होते हैं। पर चिंता की बात ये है कि पिछले कुछ समय में नॉन-स्मोकर्स को भी ये बीमारी हो रही है। इसका कारण है प्रदूषण स्‍तर का अत्यधिक बढ़ जाना। 

डॉक्‍टर से जानें लंग कैंसर के शुरुआती लक्षण क्‍या हैं 

नारायणा मल्टिस्‍पेशलिटी हॉस्पिटल में कंसल्‍टेंट मेडिकल ऑनकॉलिजिस्‍ट डॉक्‍टर रुषभ कोठारी बताते हैं, 


फेफड़ों का कैंसर कई कारणों से हो सकता है, जिनमें सबसे प्रमुख कारण धूम्रपान माना जाता है। इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी जोखिम बढ़ा सकते हैं जैसे —

● लंबे समय तक तंबाकू या धूम्रपान का संपर्क

● सेकेंड-हैंड स्मोक (दूसरों के धुएं के संपर्क में आना)

● वायु प्रदूषण

● कुछ रासायनिक पदार्थों और गैसों के संपर्क में रहना

● परिवार में कैंसर का इतिहास

शुरुआती चरण में लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए —

● लगातार खांसी रहना या खांसी का बढ़ जाना

● खांसी के साथ खून आना

● सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द

● बिना कारण वजन कम होना

● बार-बार फेफड़ों का संक्रमण होना

यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

फेफड़ों का कैंसर से बचाव पर डॉक्‍टर कहते हैं- 

1. धूम्रपान से दूरी बनाए रखें

धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है, इसलिए इसे छोड़ना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

2. वायु प्रदूषण से बचाव करें

जहां संभव हो, प्रदूषण से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करें और साफ वातावरण में समय बिताएं।

3. स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं

संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।

4. नियमित स्वास्थ्य जांच

यदि व्यक्ति हाई-रिस्क कैटेगरी में आता है, जैसे लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले लोग, तो नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग करवाना फायदेमंद हो सकता है।

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