दिल्ली में ठंड और प्रदूषण से हार्ट डिजीज, सीओपीडी और अस्थमा के मामले बढ़े: एम्स

दिल्ली में ठंड और बढ़ते प्रदूषण के कारण दिल और फेफड़ों की बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं।

Update: 2026-01-14 09:00 GMT

नई दिल्ली: दिल्ली में ठंडी हवाओं और बढ़ते वायु प्रदूषण के चलते स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों के अनुसार, ठंड के कारण दिल की बीमारियां, क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और अस्थमा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विशेष रूप से को-मॉर्बिड (एक से अधिक बीमारियों से जूझ रहे) और बुजुर्ग लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि ठंड से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

एम्स कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. राजीव नारंग ने बताया कि सर्दियों में पानी कम पीना, नमक ज्यादा लेना और प्रदूषण के कारण हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उन्होंने सलाह दी कि क्रॉनिक हार्ट पेशेंट्स सुबह की सैर से बचें, खासकर जब वायु प्रदूषण अधिक हो। डॉ. नारंग ने यह भी कहा कि घर पर ब्लड प्रेशर मॉनिटर रखना चाहिए और हफ्ते में कम से कम दो बार बीपी चेक करना जरूरी है। यदि बीपी 140/90 एमएमएचजी से अधिक हो, तो डॉक्टर से परामर्श लें।

एम्स जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग के डॉ. अभिजीत आर. राव ने कहा कि सर्दियों में शरीर का तापमान बनाए रखना बेहद जरूरी है। बुजुर्गों को सुबह जल्दी या देर शाम बाहर जाने से बचना चाहिए और दैनिक गतिविधियां धूप निकलने के बाद ही करनी चाहिए।

एम्स मेडिसिन प्रोफेसर डॉ. संजीव सिन्हा ने ठंड और प्रदूषण के कारण सांस की बीमारियों के खतरे की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि ठंडी हवा के संपर्क में आने से ब्रोंकोस्पैजम हो सकता है, जिससे सांस की नली सिकुड़ जाती है और सांस लेने में दिक्कत होती है। एम्स ओपीडी और इमरजेंसी में सीओपीडी के मरीज बढ़ रहे हैं, जो आमतौर पर धूम्रपान या प्रदूषण से प्रभावित होते हैं।

डॉ. सिन्हा ने कहा कि बुजुर्ग और सीओपीडी, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, एम्फीसेमा या अस्थमा के मरीज सर्दियों में अपनी सांसों की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी रखें।

बच्चों के डॉक्टर प्रो. राकेश लोढ़ा ने बताया कि छोटे बच्चे ठंड के प्रति संवेदनशील होते हैं। उन्हें गर्म कपड़े पहनाने चाहिए और शरीर पूरी तरह ढका होना चाहिए। (With inputs from IANS)

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