तन ही नहीं, मन के लिए भी आराम है जरूरी! जानें यूनानी चिकित्सा का सिद्धांत

यूनानी चिकित्सा के अनुसार, शरीर के साथ-साथ मन को भी संतुलित और स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त आराम बेहद जरूरी है।

Update: 2026-02-12 09:15 GMT

नई दिल्ली: यूनानी चिकित्सा में ‘हरकत-ओ-सुकून नफसानी’ यानी मानसिक सक्रियता और मानसिक विश्राम को स्वस्थ जीवन की बुनियाद माना गया है। जैसे शरीर लगातार काम करने पर बिना आराम के थक जाता है और बीमार पड़ सकता है, वैसे ही मन भी यदि तनाव, चिंता, भय या क्रोध में लगातार उलझा रहे तो उसका संतुलन बिगड़ने लगता है।

यूनानी सिद्धांतों के अनुसार, शरीर में एक जीवन शक्ति होती है जिसे ‘रूह’ कहा जाता है। यही रूह मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब भावनाएं संतुलित हों, सोच सकारात्मक हो और मन को पर्याप्त विश्राम मिले, तो रूह भी संतुलित रहती है और स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है।

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर शारीरिक थकान पर ध्यान देते हैं, लेकिन मानसिक थकावट को अनदेखा कर देते हैं। देर रात तक काम करना, स्क्रीन पर लंबे समय तक रहना, लगातार चिंता में डूबे रहना या भविष्य की फिक्र करना—ये सब मानसिक दबाव बढ़ाते हैं।

यूनानी चिकित्सा कहती है कि मानसिक सक्रियता जरूरी है, क्योंकि सोचना, सीखना और काम करना जीवन का हिस्सा है। लेकिन इसमें संतुलन होना अनिवार्य है। अत्यधिक मानसिक व्यस्तता बेचैनी, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और थकान का कारण बन सकती है, जबकि पूरी निष्क्रियता उदासी और सुस्ती को बढ़ा सकती है। इसलिए संतुलन ही स्वस्थ मन की कुंजी है।

मानसिक सुकून के लिए बड़े बदलाव जरूरी नहीं। रोज़ थोड़ा समय खुद के लिए निकालना, गहरी सांस लेना, प्रकृति में समय बिताना, नमाज़, ध्यान या प्रार्थना करना और सकारात्मक लोगों के साथ रहना मन को राहत देता है। अपनी सीमाओं को समझना और अनावश्यक दबाव से बचना भी जरूरी है।

यूनानी सिद्धांत यही सिखाता है कि संयम, सकारात्मक सोच और समय-समय पर मानसिक विश्राम अपनाकर ही मन और शरीर दोनों को स्वस्थ रखा जा सकता है। (With inputs from IANS)

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