महिलाओं में बार-बार यूटीआई की समस्या? आयुर्वेद के उपाय देंगे तुरंत राहत

महिलाओं में बार-बार पेशाब की समस्याओं (यूटीआई) में आयुर्वेदिक उपाय तेजी से राहत दिला सकते हैं।

Update: 2026-01-13 12:45 GMT

नई दिल्ली: महिलाओं में बार-बार होने वाला यूटीआई (मूत्र मार्ग संक्रमण) अब कोई साधारण समस्या नहीं माना जाता। इसे चिकित्सा जगत में ‘साइलेंट एपिडेमिक’ कहा जाता है। आंकड़ों के अनुसार, हर दो में से एक महिला अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार इस संक्रमण का सामना करती है, जबकि लगभग 25 प्रतिशत महिलाओं को यह बार-बार होता है।

यूटीआई की वजह सिर्फ बैक्टीरिया नहीं होते, बल्कि महिलाओं की शारीरिक बनावट और जीवनशैली भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। महिलाओं का मूत्रमार्ग पुरुषों की तुलना में छोटा होता है, जिससे बैक्टीरिया आसानी से ब्लैडर तक पहुंच जाते हैं। इसके अलावा, मूत्रमार्ग का गुदा के पास होना और मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन में कमी भी संक्रमण के जोखिम को बढ़ा देती है।

कम पानी पीना, पेशाब देर तक रोकना, सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल और माहवारी के दौरान स्वच्छता का ध्यान न रखना भी यूटीआई को आम बनाते हैं।

आयुर्वेद में यूटीआई को केवल बैक्टीरिया का हमला नहीं माना जाता, बल्कि इसे मूत्रकृच्छ्र या मूत्राघात कहा गया है और इसे शरीर में पित्त दोष के असंतुलन से जोड़ा गया है। अत्यधिक गर्म, तीखे, नमकीन या खट्टे भोजन और अपच या अजीर्ण पित्त को बढ़ाते हैं, जिससे मूत्राशय में जलन, बार-बार पेशाब, पेट या कमर में दर्द जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।

आयुर्वेद में इसके स्थायी और सुरक्षित समाधान भी बताए गए हैं। चंद्रप्रभा वटी मूत्राशय की मांसपेशियों को मजबूत कर जलन को कम करती है। गोक्षुरादि गुग्गुल पेशाब की मात्रा बढ़ाकर बैक्टीरिया को बाहर निकालता है। नीरी तुरंत राहत देती है और संक्रमण को किडनी तक पहुंचने से रोकती है।

इसके अलावा, चन्दनासय शरीर की गर्मी को शांत करता है और पेशाब में जलन को जड़ से खत्म करता है। जड़ी-बूटियां जैसे पुनर्नवा, वरुण और गिलोय भी शरीर की सुरक्षा बढ़ाती हैं।

फौरन राहत के लिए आयुर्वेद में सुबह धनिया और मिश्री का पानी पीने की सलाह दी जाती है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना, स्वच्छता बनाए रखना और तीखे या भारी भोजन से परहेज करना भी यूटीआई से बचाव में मदद करता है। (With inputs fropm IANS)

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