नए वैज्ञानिक शोध में खुलासा, कैंसर अनुसंधान में बिल्लियों की महत्वपूर्ण भूमिका

हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पालतू बिल्लियों और इंसानों के कैंसर के बीच अहम जेनेटिक समानताएं सामने आई हैं।

Update: 2026-02-23 06:30 GMT

हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने कैंसर शोध के क्षेत्र में नई संभावनाओं को जन्म दिया है। इस अध्ययन में पालतू बिल्लियों और इंसानों के कैंसर के बीच महत्वपूर्ण आनुवंशिक समानताओं का खुलासा हुआ है। यह शोध 19 फरवरी को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल साइंस में प्रकाशित हुआ और वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ गुएल्फ के शोधकर्ताओं ने सैकड़ों पालतू बिल्लियों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के ट्यूमर का डीएनए विश्लेषण किया और उनका विस्तृत जेनेटिक मानचित्र तैयार किया। अध्ययन का नेतृत्व कैंसर जीवविज्ञानी जेफ्री वुड ने किया।

शोध में पाया गया कि कई महत्वपूर्ण जीन, जैसे टीपी53, जो इंसानों में कैंसर के विकास और फैलाव से जुड़े होते हैं, वही जीन बिल्लियों में भी समान भूमिका निभाते हैं। यह संकेत देता है कि कैंसर का जैविक व्यवहार कई स्तनधारी प्रजातियों में समान हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पालतू बिल्लियां इंसानों के साथ एक ही वातावरण साझा करती हैं—जैसे घर, प्रदूषण और जीवनशैली से जुड़े प्रभाव। इसलिए उनमें विकसित होने वाले ट्यूमर मानव कैंसर को समझने का एक प्राकृतिक मॉडल बन सकते हैं। इसी कारण इस शोध को “वन हेल्थ” अवधारणा से भी जोड़ा जा रहा है, जिसमें पशु और मानव स्वास्थ्य को परस्पर जुड़ा माना जाता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि इन आनुवंशिक समानताओं के आधार पर विकसित नई दवाएं और लक्षित उपचार भविष्य में मानव कैंसर इलाज को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। वैज्ञानिक समुदाय इसे कैंसर अनुसंधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति मान रहा है।

With Inputs From IANS

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