Ozempic Results: ओज़ेम्पिक से हर किसी का वजन नहीं होता कम? नई स्टडी में हुआ 'छिपे हुए कारणों' का खुलासा,जानें एक्सपर्ट की राय
हाल ही में हुए एक रिसर्च ने इस धारणा को चुनौती दी है कि ओज़ेम्पिक सभी के लिए समान रूप से प्रभावी है.
ओज़ेम्पिक (Ozempic) इन दिनों वजन घटाने और डायबिटीज कंट्रोल के लिए दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. लेकिन क्या यह दवा हर किसी पर एक जैसा असर करती है? हाल ही में हुए एक रिसर्च ने इस धारणा को चुनौती दी है कि ओज़ेम्पिक सभी के लिए समान रूप से प्रभावी है. ओजेम्पिक मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के लिए बनाई गई दवा है, जिसमें सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) नामक एक्टिव तत्व होता है. यह शरीर में GLP-1 हार्मोन के रास्ते (Pathway) पर काम करता है, जो भूख को कंट्रोल करने और इंसुलिन स्राव को विनियमित करने में मदद करता है. हालांकि, रिसर्चर ने पाया है कि कुछ लोगों में इस हार्मोन पाथवे के प्रति संवेदनशीलता कम होती है, जिससे दवा का असर बदल जाता है.
क्या कहती है नई स्टडी?
इंसानों और चूहों पर किए गए प्रयोगों और नैदानिक परीक्षणों के आंकड़ों के आधार पर रिसर्चर ने पाया कि GLP-1 सिग्नलिंग में अंतर:हर व्यक्ति का शरीर इस हार्मोन के प्रति अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है. शारीरिक बनावट का असर: कुछ लोगों की फिजियोलॉजी ओजेम्पिक के फॉर्मूलेशन पर मजबूती से प्रतिक्रिया नहीं करती है. खुराक और समय: दवा की प्रभावशीलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे किस समय और कितनी मात्रा में दिया गया है.
नॉन-रिस्पॉन्डर्स के पीछे के 4 बड़े कारण
स्टडी यह साफ करता है कि आखिर क्यों कुछ लोग ओज़ेम्पिक से नाटकीय रूप से वजन कम कर लेते हैं, जबकि अन्य को निरंतर उपयोग के बावजूद मामूली परिणाम मिलते हैं. अनुवांशिक अलग-अलग (Genetic Differences): प्रत्येक व्यक्ति का जेनेटिक मेकअप अलग होता है, जो दवा के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है.गट-ब्रेन सिग्नलिंग:आंत और ब्रेन के बीच होने वाले संवाद में समस्या होने पर भूख को कंट्रोल करने वाला सिग्नल ठीक से काम नहीं कर पाता. क्रोनिक इन्फ्लेमेशन (पुरानी सूजन):शरीर में मौजूद सूजन दवा के काम करने के तरीके को बाधित कर सकती है. मेटाबॉलिक डिसफंक्शन: मेटाबॉलिज्म से जुड़ी गंभीर समस्याओं के कारण शरीर दवा को सही ढंग से प्रोसेस नहीं कर पाता.
एक्सपर्ट की सलाह: पर्सनल दृष्टिकोण है जरूरी
स्टडी इस बात पर जोर देता है कि ओजेम्पिक का उपयोग केवल डॉक्टर की कड़ी निगरानी में ही किया जाना चाहिए. डॉक्टर रोगी की शारीरिक स्थिति और मेडिकल हिस्ट्री को देखकर एक 'पर्सनलाइज्ड अप्रोच' अपना सकते हैं. बिना डॉक्टरी सलाह के इसका उपयोग न केवल बेअसर हो सकता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा भी हो सकता है.