नींद में खलल है ब्लू लाइट, सोने से 1 घंटे पहले करें ये काम, आएगी चैन की नींद

सोने से पहले ब्लू लाइट से बचने और सही आदतें अपनाने से बेहतर नींद पाई जा सकती है।

Update: 2026-02-09 11:00 GMT

नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसी डिवाइस पर बढ़ती निर्भरता नींद में खलल का मुख्य कारण बन गई है। दिनभर की थकान के बावजूद रात में नींद न आना और नींद का टूटना आम समस्या बन गया है। अनियमित दिनचर्या, लंबे स्क्रीन समय और मानसिक तनाव से मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर प्रभावित होता है, जो नींद लाने में अहम भूमिका निभाता है।

स्क्रीन से दूरी बनाना: नींद की पहली चाबी

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, सोने से कम से कम एक घंटे पहले किसी भी तरह की स्क्रीन—मोबाइल, टीवी, लैपटॉप या टैबलेट—का उपयोग पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (ब्लू लाइट) दिमाग को एक्टिव रखती है और मेलाटोनिन हार्मोन को दबा देती है। इसका सीधा असर नींद पर पड़ता है—नींद देर से आती है, टूट-फूट वाली रहती है और सुबह थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है।

ब्लू लाइट से बचाव के उपाय

  • शाम की शांत गतिविधियां अपनाएं: सोने से पहले हल्का संगीत सुनना, किताब पढ़ना, हल्की स्ट्रेचिंग या ध्यान करना मन को शांत करता है।
  • घर का वातावरण सुधारें: सोने का कमरा ठंडा और अंधेरा होना चाहिए। नियमित रूप से सोने और उठने का समय तय करें।
  • भोजन और ड्रिंक पर ध्यान दें: रात में भारी भोजन और कैफीन का सेवन नींद को प्रभावित कर सकता है। हल्का और सुपाच्य भोजन ही लें।
  • डीप ब्रीदिंग और योग: कुछ मिनटों की गहरी सांस लेने की तकनीक या हल्की योगासन नींद को बढ़ावा देती है और तनाव कम करती है।

नींद की कमी और स्वास्थ्य पर प्रभाव

लगातार नींद की कमी से इम्युनिटी कमजोर होती है, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता घटती है, मोटापा और हृदय रोग का खतरा बढ़ता है। युवा और बच्चे, जिनका स्क्रीन समय ज्यादा होता है, विशेष रूप से नींद की कमी का शिकार होते हैं।

निष्कर्ष

7-8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद हर उम्र के लिए जरूरी है। ब्लू लाइट से दूरी बनाए रखना, शाम की शांत गतिविधियां अपनाना और नियमित जीवनशैली अपनाना नींद की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करता है। यदि आप भी देर रात तक फोन या लैपटॉप पर समय बिताते हैं, तो आज से ही इसे बदलने की शुरुआत करें। (With inputs from IANS)

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