पेट, त्वचा और जोड़ों के लिए फायदेमंद वरुण मुद्रा, जानें अभ्यास से क्या परिवर्तन आते हैं
वरुण मुद्रा पेट, त्वचा और जोड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर तक मोबाइल चलाना, गलत खानपान, कम पानी पीना और लगातार तनाव लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं। इसका प्रभाव सबसे पहले त्वचा, पाचन तंत्र और जोड़ों पर नजर आता है। कहीं त्वचा अत्यधिक रूखी हो जाती है तो कहीं गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी परेशानियां आम हो गई हैं।
इन समस्याओं से बचाव के लिए आयुष मंत्रालय नियमित रूप से योग को जीवनशैली में शामिल करने की सलाह देता है। हाथों से की जाने वाली योग मुद्राएं शरीर में संतुलन बनाए रखने का आसान और प्रभावी तरीका मानी जाती हैं। इन्हीं में से एक वरुण मुद्रा है, जिसे जल तत्व से जुड़ी परेशानियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी बताया गया है।
योग शास्त्र के अनुसार मानव शरीर पंच तत्वों से बना है, जिनमें जल तत्व का अहम स्थान है। जब शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ता है, तो इसका सीधा असर त्वचा, पेट और जोड़ों पर दिखाई देता है। वरुण मुद्रा इस असंतुलन को ठीक करने में मदद करती है और शरीर में आवश्यक नमी बनाए रखती है।
इस मुद्रा का नियमित अभ्यास त्वचा को अंदर से हाइड्रेट करने में सहायक होता है, जिससे ड्राइनेस कम होती है और त्वचा धीरे-धीरे मुलायम व स्वस्थ नजर आने लगती है। आयुष मंत्रालय का भी मानना है कि सही जल संतुलन से त्वचा की कई समस्याएं खुद-ब-खुद कम हो सकती हैं।
पाचन से जुड़ी दिक्कतों जैसे गैस, कब्ज और भारीपन में भी वरुण मुद्रा फायदेमंद साबित होती है। यह पाचन तंत्र को सक्रिय करती है और आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाकर पेट को हल्का रखने में मदद करती है।
इसके अलावा जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न से परेशान लोगों के लिए भी यह मुद्रा उपयोगी मानी जाती है। शरीर में नमी की कमी के कारण जोड़ों में रगड़ बढ़ती है, जिससे दर्द होता है। वरुण मुद्रा जोड़ों में लचीलापन बनाए रखने में सहायक होती है।
एसिडिटी, सीने में जलन और अपच जैसी समस्याओं में भी इसका अभ्यास राहत पहुंचा सकता है। यह पेट के अंदरूनी संतुलन को शांत कर अम्लता को नियंत्रित करने में मदद करती है।
वरुण मुद्रा करना बेहद आसान है। शांत जगह पर बैठकर हाथ घुटनों पर रखें, छोटी उंगली और अंगूठे को आपस में मिलाएं और बाकी उंगलियां सीधी रखें। आंखें बंद कर सामान्य गति से सांस लेते हुए इसे रोज 15 से 20 मिनट तक करें। (With inputs from IANS)