रीढ़ की हड्डी को बनाना है लचीला? आज ही अपनी दिनचर्या में शामिल करें तिर्यक भुजंगासन

रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने के लिए तिर्यक भुजंगासन को अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल करें।

Update: 2026-02-26 10:45 GMT

नई दिल्ली: आज की तेज और भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, पीठ दर्द और पेट जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। थोड़ी सी लापरवाही भी इन्हें बढ़ा सकती है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, चाहे शारीरिक हो या मानसिक, इन परेशानियों का समाधान योगासन में छिपा है।

योग विशेषज्ञ बताते हैं कि नियमित अभ्यास और संतुलित आहार के साथ तिर्यक भुजंगासन (ट्विस्टिंग कोबरा पोज़) पीठ और पेट की समस्याओं में काफी राहत दे सकता है। यह योगासन पेट के बल लेटकर किया जाता है और शुरुआती लोग भी इसे आसानी से कर सकते हैं।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, पीठ और गर्दन के दर्द को कम करता है, फेफड़ों को मजबूत करता है और पेट के अंगों जैसे यकृत और पाचन तंत्र को सक्रिय करता है। साथ ही, यह कंधों के तनाव को घटाता है, मासिक धर्म संबंधी समस्याओं में मदद करता है, तनाव कम करता है और कमर की अतिरिक्त चर्बी घटाने में सहायक है।

तरीका:

  • पेट के बल लेट जाएं, दोनों पैरों के बीच हल्का गैप रखें।
  • हाथों की हथेलियां कंधों के पास फर्श पर रखें, कोहनियां शरीर को छूती हों।
  • गहरी सांस लें और छाती व ऊपरी शरीर को ऊपर उठाएं, कमर फर्श पर लगी रहे।
  • सांस छोड़ते हुए सिर और धड़ को दाईं ओर घुमाएं, जितना आरामदायक हो। बाईं एड़ी को दाहिने कंधे के पास देखें।
  • धीरे-धीरे सीधे होकर ऊपर देखें और इसी तरह बाईं ओर दोहराएं।
  • योग विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि गंभीर पीठ चोट, हर्निया या हाल ही में पेट की सर्जरी वाले लोग इस आसन का अभ्यास न करें।

निष्कर्ष:

तिर्यक भुजंगासन नियमित करने से पूरे शरीर की शारीरिक समस्याओं में राहत मिलती है और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। (With inputs from IANS)

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