आयुर्वेद में हजारों साल पुरानी तकनीक है ऑयल पुलिंग; सिर्फ दांत नहीं, गट हेल्थ के लिए भी बेहतर

ऑयल पुलिंग आयुर्वेद की प्राचीन विधि है, जो मुंह की स्वच्छता के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाने में मदद करती है।

Update: 2026-02-23 11:00 GMT

नई दिल्ली: भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में लोग अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि कम उम्र में ही कई बीमारियां शरीर को घेरने लगती हैं। ऐसे में अब बड़ी संख्या में लोग दोबारा आयुर्वेदिक उपायों की ओर रुख कर रहे हैं।

आयुर्वेद की प्रमुख पद्धतियों में से एक है ऑयल पुलिंग, जिसे शास्त्रों में ‘कवला’ या ‘गंडूषा’ कहा गया है। यह सदियों पुरानी तकनीक है, जिसका उद्देश्य मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को बाहर निकालना और दांत, मसूड़े, जीभ तथा गले को स्वस्थ बनाए रखना है। यदि इसे रोजाना की दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो यह न केवल मौखिक स्वास्थ्य बल्कि पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी हो सकती है।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, मुंह और गट हेल्थ का गहरा संबंध पूरे शरीर से जुड़ा होता है। जो भी भोजन हम ग्रहण करते हैं, वह सबसे पहले मुंह से होकर ही शरीर में प्रवेश करता है। यदि मुंह में गंदगी, संक्रमण या बैक्टीरिया मौजूद हों, तो उनका प्रभाव पेट और पाचन प्रक्रिया पर पड़ सकता है, जो आगे चलकर संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

मुंह में पनपने वाले हानिकारक बैक्टीरिया दांतों की सड़न, मसूड़ों की सूजन, सांसों की दुर्गंध और लार से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। यही बैक्टीरिया भोजन के साथ पेट में पहुंचकर पाचन तंत्र को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऑयल पुलिंग इसी समस्या के समाधान पर केंद्रित है।

इस प्रक्रिया के दौरान जब तेल को कुछ समय तक मुंह में घुमाया जाता है, तो उसकी चिपचिपी प्रकृति बैक्टीरिया को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। कुछ देर बाद ये बैक्टीरिया तेल में फंस जाते हैं और कुल्ला करने के साथ बाहर निकल जाते हैं। नियमित अभ्यास से दांत और मसूड़े साफ रहते हैं, मुंह की दुर्गंध कम होती है और कैविटी की संभावना भी घट सकती है।

ऑयल पुलिंग करने की विधि सरल है। एक बड़ा चम्मच तेल मुंह में लेकर उसे धीरे-धीरे 15 मिनट तक घुमाएं। ध्यान रहे कि तेल को निगलना नहीं है। जब तेल पतला होकर दूधिया रंग का हो जाए, तो उसे थूक दें और गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। इसे सुबह खाली पेट करना अधिक लाभकारी माना जाता है।

इसके लिए नारियल, तिल या सूरजमुखी तेल का उपयोग किया जा सकता है, हालांकि नारियल और तिल का तेल ज्यादा प्रभावी माने जाते हैं। यदि किसी को दांतों से जुड़ी गंभीर समस्या हो, मुंह में घाव हों या ऑयल पुलिंग के बाद असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो इसे बंद कर देना चाहिए। (With inputs from IANS)

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