अनिद्रा, माइग्रेन या तनाव, बेहद कारगर है शिरोधारा, सावधानी भी जरूरी

अनिद्रा, माइग्रेन या तनाव के इलाज में शिरोधारा प्रभावशाली है, लेकिन इसे सावधानी से अपनाना चाहिए।

Update: 2026-01-15 07:30 GMT

नई दिल्ली: आज के समय में कामकाजी जीवनशैली, गैजेट्स पर बढ़ती निर्भरता और अनियमित दिनचर्या ने अनिद्रा, तनाव, माइग्रेन, चिंता और थकान जैसी समस्याओं को आम बना दिया है। ऐसे में आयुर्वेद प्राचीन और प्रभावी थेरेपी शिरोधारा की सलाह देता है, जो इन समस्याओं में बेहद फायदेमंद है।

शिरोधारा में गर्म औषधीय तेल, दूध या जड़ी-बूटियों के अर्क की लगातार धारा माथे पर डालकर मन और शरीर को शांत किया जाता है। यह नींद लाने, माइग्रेन और सिरदर्द कम करने, नसों को आराम देने और पूरे शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में मदद करती है। खास बात यह है कि शिरोधारा के कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, शिरोधारा एक प्रभावी आयुर्वेदिक चिकित्सा है, जो अनिद्रा, तनाव और मानसिक थकान जैसी आम समस्याओं में कारगर है। यह प्राचीन केरल की थेरेपी है, जिसमें माथे पर लगातार औषधीय द्रव्य गिराई जाती है।

शिरोधारा सबसे पहले अनिद्रा को जड़ से दूर करती है और मन को शांत और एकाग्र बनाती है। माइग्रेन और लगातार सिरदर्द, आंखों में चमक, उल्टी जैसी परेशानियों में भी यह राहत देती है।

यह थेरेपी केवल दर्द और मानसिक तनाव कम करने तक सीमित नहीं है। शिरोधारा चेहरे की झुर्रियों को कम कर त्वचा को पोषण और प्राकृतिक चमक देती है। नियमित उपयोग से चेहरा तरोताजा और जवां दिखता है। बालों की समस्याओं जैसे झड़ना, डैंड्रफ और कमजोर बाल भी इस थेरेपी से कम हो सकती हैं। यह स्कैल्प को पोषण देती है, रक्त संचार बढ़ाती है और बालों की जड़ों को मजबूत बनाती है।

माथे पर लगातार बहने वाली गर्म धारा मस्तिष्क को आराम देती है और तनाव, चिंता व डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं में मदद करती है। हालांकि, इसे स्वयं ट्राई न करें और हमेशा किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की देखरेख में ही करवाएं। (With inputs from IANS)

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