तनाव, अनिद्रा और थकान से राहत दिलाने में मदद करती है चिन्मय मुद्रा, सेहत में आएगा बड़ा बदलाव
चिन्मय मुद्रा तनाव, अनिद्रा और थकान को कम करके सेहत में सुधार लाती है।
नई दिल्ली: आज की तेज-तर्रार जिंदगी में सेहत बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। असंतुलित खानपान, मोबाइल और स्क्रीन पर अधिक समय बिताना, नींद की कमी और लगातार तनाव शरीर और मन दोनों को कमजोर कर देते हैं। अक्सर लोग छोटी-छोटी समस्याओं जैसे चिड़चिड़ापन, थकान और अनिद्रा को नजरअंदाज कर देते हैं, जो भविष्य में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।
ऐसे में योग के कुछ आसान अभ्यास शरीर और मन को संतुलित करने में मदद करते हैं, जिनमें चिन्मय मुद्रा भी शामिल है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि सांस, मन और शरीर के बीच तालमेल बनाने की प्रक्रिया है। संस्कृत में “चिन्मय” का अर्थ है “पूर्ण जागरूकता” या “चेतना से भरा हुआ”, और यह मुद्रा व्यक्ति को अपने भीतर की स्थिति को समझने और महसूस करने में मदद करती है।
इस मुद्रा में हाथों की उंगलियों की विशेष स्थिति और सांस पर ध्यान केंद्रित करना शरीर के अंदर सकारात्मक बदलाव लाता है। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर पांच तत्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – से बना है, और हाथों की उंगलियां इन तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। चिन्मय मुद्रा में अंगूठे और तर्जनी उंगली को जोड़ते हुए बाकी तीन उंगलियां हथेली की ओर मुड़ती हैं, जिससे सांस की गति गहरी और स्थिर होती है।
चिन्मय मुद्रा का सबसे पहला असर मानसिक स्वास्थ्य पर दिखाई देता है। लगातार तनाव और चिंता दिमाग को थका देती हैं, जिसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। इस मुद्रा के अभ्यास से मन धीरे-धीरे शांत होता है और दिमाग को आराम मिलता है, जिससे तनाव और चिंता कम होती हैं।
नींद की समस्याओं में भी यह मुद्रा फायदेमंद है। नियमित अभ्यास से नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है, और बार-बार टूटती नींद या देर से सोने की समस्या कम होती है।
एकाग्रता बढ़ाने में भी चिन्मय मुद्रा मददगार है। सांस पर ध्यान केंद्रित करने से मानसिक फोकस मजबूत होता है, जिससे पढ़ाई करने वाले बच्चों की समझदारी बढ़ती है और कामकाजी लोग अपने काम पर बेहतर ध्यान दे पाते हैं।
शारीरिक स्वास्थ्य के लिहाज से यह मुद्रा पाचन क्रिया को बेहतर बनाती है। तनाव और चिंता का असर पाचन तंत्र पर सीधे पड़ता है, लेकिन मन शांत होने से गैस, अपच और भारीपन जैसी समस्याएं कम होती हैं। साथ ही, यह मुद्रा शरीर की ऊर्जा संतुलित करती है, जिससे व्यक्ति हल्का और अधिक सक्रिय महसूस करता है। (With inputs from IANS)