तनाव, चिंता और हाई ब्लड प्रेशर पर कंट्रोल, धर्मचक्र मुद्रा दिल‑दिमाग को बनाए स्वस्थ

धर्मचक्र मुद्रा तनाव, चिंता और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित कर दिल और दिमाग को स्वस्थ रखती है।

Update: 2026-02-07 09:00 GMT

नई दिल्ली: आज की तनावपूर्ण जिंदगी में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे में योग और ध्यान हमारे लिए वरदान साबित हो सकते हैं। इनमें से एक विशेष मुद्रा है—‘धर्मचक्र मुद्रा’। यह मुद्रा न केवल शरीर को मजबूत बनाती है, बल्कि मानसिक शांति प्रदान करती है, तनाव कम करती है और ध्यान बढ़ाने में मदद करती है।

धर्मचक्र मुद्रा के कई लाभ हैं। यह शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करती है और दिमाग की एकाग्रता को बढ़ाती है। इसके नियमित अभ्यास से सोचने और समझने की क्षमता मजबूत होती है। यह हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करती है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इस मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। यह हमें खुश और संतुष्ट महसूस कराती है। नियमित अभ्यास से आंतरिक शक्ति बढ़ती है, आत्मविश्वास मजबूत होता है और जीवन में स्थिरता आती है। धर्मचक्र मुद्रा न केवल शरीर और मस्तिष्क को मजबूत बनाती है, बल्कि जीवन में संतुलन और स्थिरता भी लाती है। रोजाना 10–15 मिनट अभ्यास करने से तनाव कम होता है, ध्यान बढ़ता है और दिल‑दिमाग स्वस्थ रहता है।

धर्मचक्र मुद्रा का अभ्यास शुरू करने के लिए शांत और आरामदायक जगह पर बैठें। आप सुखासन या पद्मासन में बैठ सकते हैं। शरीर और चेहरे की मांसपेशियों को आराम दें। होंठ हल्के खुले रखें और दो‑तीन गहरी सांस लें। शुरू में ध्यान को स्थिर करना मुश्किल हो सकता है, इसलिए सांस पर ध्यान केंद्रित करें। गहरी सांस लें और धीरे‑धीरे छोड़ें।

अब हाथों को अंजलि मुद्रा में मिलाएं। धीरे‑धीरे उंगलियों पर ध्यान दें और उन्हें जोड़ें। बाएं हाथ की हथेली हृदय की ओर रखें और दाएं हाथ को मोड़कर उसकी हथेली विपरीत दिशा में रखें। फिर बाएं हाथ की बीच की उंगली और दाहिने हाथ की उंगलियों को जोड़कर एक वृत्त बनाएं। इस मुद्रा में कम से कम दस मिनट बैठें। इस दौरान अपनी सांस और उंगलियों पर ध्यान केंद्रित करें। गहरी सांस लेने से मन शांत होगा और ध्यान में सुधार होगा। (With inputs from IANS)

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