रोजाना करें पूर्ण भुजंगासन, मजबूत होगी रीढ़ तो बदन दर्द से मिलेगी मुक्ति

रोजाना पूर्ण भुजंगासन करने से रीढ़ मजबूत होती है और पीठ व शरीर के दर्द से राहत मिलती है।

Update: 2026-01-22 05:00 GMT

नई दिल्ली: योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। आज की अनियमित और तनावपूर्ण जीवनशैली में योगासन का महत्व और भी बढ़ गया है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्ण भुजंगासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बेहद लाभकारी हो सकता है।

मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के मुताबिक, पूर्ण भुजंगासन भुजंगासन का एक उन्नत और प्रभावशाली रूप है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने के साथ-साथ पीठ, कंधों और पूरे शरीर को मजबूत करता है। साथ ही यह छाती को खोलकर फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से गर्दन, कंधों और कमर की जकड़न कम होती है और शरीर में स्फूर्ति आती है।

इस आसन को करते समय सावधानी बेहद जरूरी है। अभ्यास के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं और दोनों हथेलियां कंधों के पास रखें। गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे छाती, गर्दन और सिर को ऊपर उठाएं। कोहनियों को हल्का मोड़ें और कंधों को पीछे की ओर खींचें।

इसके बाद घुटनों को मोड़ते हुए पैरों के पंजे ऊपर उठाएं और सिर को पीछे की ओर ले जाकर पैरों से छूने का प्रयास करें। जितनी देर आराम से रह सकें, बिना शरीर पर जोर डाले इस मुद्रा में टिके रहें। फिर धीरे-धीरे शवासन में लौट आएं और कुछ समय तक शरीर को पूरी तरह शिथिल रखें।

पूर्ण भुजंगासन के नियमित अभ्यास से रीढ़ मजबूत और लचीली होती है, पाचन क्रिया बेहतर होती है, थायरॉइड ग्रंथि सक्रिय होती है और तनाव कम होता है। यह आसन खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं या पीठ दर्द से परेशान रहते हैं। हालांकि, गर्भवती महिलाएं, गंभीर पीठ की समस्या वाले लोग, उच्च रक्तचाप, हर्निया या हाल में सर्जरी कराने वाले व्यक्ति इस आसन से परहेज करें।

शुरुआत में इस आसन का अभ्यास धीरे-धीरे और योग विशेषज्ञ की देखरेख में करना बेहतर माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योगासन धैर्य और नियमितता से करने चाहिए, क्योंकि गलत तरीके से किए गए उन्नत आसन चोट का कारण बन सकते हैं। (With inputs from IANS)

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