नई दिल्ली: सफेद चीनी या टेबल शुगर आज लगभग हर रसोई में इस्तेमाल होती है, चाहे चाय हो या कोई मिठाई। लेकिन इसमें 90% तक सुक्रोज होने के कारण यह स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है। लगातार सेवन से यह रक्त शर्करा बढ़ा सकता है और मोटापा, डायबिटीज़ और अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है। इसी वजह से इसे “मीठा जहर” भी कहा जाता है।

अगर आप भी मीठे के शौकीन हैं और सफेद चीनी का सेवन करते हैं, तो इसे छोड़कर इन पांच स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों को आहार में शामिल किया जा सकता है:

1. खजूर: प्राकृतिक रूप से पके खजूर मीठे तो होते हैं, लेकिन हॉर्मोन्स को संतुलित रखने और मिठास की तलब कम करने में मदद करते हैं। बाजार में गुड़ में पके खजूर भी मिलते हैं, जिनके अपने फायदे हैं।

2. नारियल चीनी: नारियल के रस से बनी यह चीनी लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली होती है, जो रक्त में शुगर तेजी से नहीं बढ़ने देती। इसमें खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर हैं, लेकिन कैलोरी थोड़ी अधिक होती है।

3. स्टीविया: इसे मीठी तुलसी के नाम से भी जाना जाता है। यह जीरो कैलोरी और जीरो शुगर वाला विकल्प है। हल्की मीठास के साथ कड़वाहट भी होती है। स्टीविया का सेवन शुगर लेवल बढ़ने से रोकता है और हाई ब्लड प्रेशर, गैस, एसिडिटी और त्वचा रोगों में भी फायदेमंद माना जाता है।

4. धागे वाली मिश्री: यह स्वाद में मीठी होने के साथ पेट को ठंडक देती है और पाचन में मदद करती है। इसके अलावा, इसमें सफेद चीनी की तुलना में कम कैलोरी होती है।

5. गुड़ या गुड़ से बनी शक्कर: यह आसानी से बाजार में उपलब्ध है और सफेद चीनी के मुकाबले स्वास्थ्य के लिए कम हानिकारक है।

इन विकल्पों को अपनाकर आप मीठा खाने का स्वाद बनाए रख सकते हैं और स्वास्थ्य का भी ध्यान रख सकते हैं। (With inputs from IANS)

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मीठा पसंद करने वालों के लिए सेहतमंद पांच विकल्प सुझाए गए हैं।
Kanchan Chaurasiya
Kanchan Chaurasiya

Kanchan Chaurasiya joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Marketing Coordinator. She holds a Bachelor's degree in Arts from Delhi University and has completed certifications in digital marketing. With a strong interest in health news, content creation, hospital updates, and emerging trends, Kanchan manages social media, news coverage, and public relations activities. She coordinates media outreach, creates press releases, promotes healthcare professionals and institutions, and supports health awareness campaigns to ensure accurate, engaging, and timely communication for the medical community and the public.