जनवरी भारत में केवल नए साल की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह फसल कटाई का समय भी होता है। इस दौरान पंजाब में लोहड़ी और बैसाखी, असम में बिहू, दक्षिण भारत में पोंगल और पूरे देश में मकर संक्रांति जैसे पर्व मनाए जाते हैं।

इन त्योहारों की मिठाइयों में गुड़ एक अहम सामग्री है। तिल के लड्डू, मूँगफली की चिक्की और मीठा पोंगल जैसी पारंपरिक मिठाइयाँ रिफाइंड चीनी की जगह गुड़ से बनाई जाती हैं। सवाल यह है कि क्या गुड़ वास्तव में चीनी से बेहतर है? विशेषज्ञों का मानना है कि हाँ, लेकिन कुछ सीमाओं के साथ।

गुड़ एक प्राकृतिक मिठास है, जिसे गन्ने या ताड़ के रस को उबालकर तैयार किया जाता है। इसमें शीरा (molasses) मौजूद रहता है, जिसमें आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और कैल्शियम जैसे खनिज पाए जाते हैं। यह कार्बोहाइड्रेट से तुरंत ऊर्जा देता है और साथ ही थोड़ी मात्रा में पोषक तत्व भी प्रदान करता है। ठंड के मौसम में गुड़ शरीर को गर्माहट और ताक़त देने में मदद करता है। संक्रांति के व्यंजनों में जब इसे मेवे और बीजों के साथ मिलाया जाता है, तो यह स्वस्थ वसा और जटिल कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत बन जाता है।

गुड़ का एक बड़ा लाभ पाचन से जुड़ा है। यह पाचक एंजाइमों को सक्रिय करता है, जिससे कब्ज और पेट फूलने की समस्या कम होती है। परंपरा के अनुसार भोजन के बाद गुड़ खाना पाचन में सहायक माना जाता है। इसमें मौजूद आयरन हीमोग्लोबिन को बनाए रखने में मदद करता है और सीमित मात्रा में लेने पर हल्के एनीमिया वाले लोगों के लिए लाभकारी हो सकता है।

गुड़ को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला भी माना जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और जिंक जैसे तत्व होते हैं, जो मौसमी बदलाव के दौरान सर्दी, खाँसी और थकान से बचाव में मदद कर सकते हैं। हालांकि, “लीवर डिटॉक्स” या “ब्लड प्यूरिफिकेशन” जैसे दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं और इन्हें पारंपरिक मान्यता ही समझना चाहिए।

फिर भी, यह याद रखना ज़रूरी है कि गुड़ भी चीनी का ही एक रूप है। इसमें कैलोरी उतनी ही होती है जितनी रिफाइंड चीनी में और यह रक्त शर्करा स्तर को बढ़ा सकता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स थोड़ा कम है, लेकिन मधुमेह, मोटापा, PCOD या इंसुलिन प्रतिरोध वाले लोगों को इसे डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेना चाहिए।

गुणवत्ता भी एक अहम पहलू है। बाज़ार में अक्सर मिलावटी गुड़ मिलता है, जिसमें रसायन या कृत्रिम रंग मिलाए जाते हैं। इसलिए हमेशा शुद्ध और जैविक गुड़ ही विश्वसनीय स्रोत से खरीदना चाहिए।

कुल मिलाकर, गुड़ पोषण की दृष्टि से चीनी से बेहतर है और पारंपरिक मिठाइयों में सीमित मात्रा में उपयुक्त है। इसे चीनी का विकल्प बनाना चाहिए, न कि अतिरिक्त मात्रा में जोड़ना। त्योहारों की मिठाइयों का आनंद संयम से लें और गुड़ को मेवों या रेशेदार खाद्य पदार्थों के साथ मिलाकर खाएँ। ध्यान रखें कि प्राकृतिक मिठास भी सीमित मात्रा में ही लाभकारी होती है।

Disclaimer: The views expressed in this article are of the author and not of Health Dialogues. The Editorial/Content team of Health Dialogues has not contributed to the writing/editing/packaging of this article.


Dr Sujatha Stephen
Dr Sujatha Stephen

Dr Sujatha Stephen, Chief Dietitian at Yashoda Hospitals, Hyderabad, is a renowned nutrition expert with over 20 years of experience. Widely recognised from her TV appearances, she has helped thousands achieve weight loss and manage diseases through proper nutrition, earning several media excellence awards.