मिलेट महोत्सव धमतरी: डॉ. खादर वली ने बताया क्यों सुपरफूड हैं मोटे अनाज

धमतरी में आयोजित मिलेट महोत्सव में किसानों को मोटे अनाज के फायदे बताते पद्मश्री डॉ. खादर वली
धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सोमवार को मिलेट महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें ‘मिलेट मैन ऑफ इंडिया’ पद्मश्री डॉ. खादर वली विशेष रूप से शामिल हुए। उनके आगमन से जिले के किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला।
इस अवसर पर डॉ. खादर वली ने किसानों को ऐसा मार्गदर्शन दिया, जो न सिर्फ उनकी आय बढ़ाने में मददगार हो सकता है, बल्कि समाज को कई गंभीर बीमारियों से बचाने की दिशा में भी अहम साबित हो सकता है।
धमतरी कलेक्टर कार्यालय में किसानों के साथ आयोजित बैठक में पारंपरिक खेती और देसी मिलेट्स यानी मोटे अनाजों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. वली ने कहा कि आज लोग अत्यधिक मात्रा में गेहूं और चावल का सेवन कर रहे हैं, जो कई बीमारियों का कारण बन रहा है। यदि आहार में ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो और कुटकी जैसे पारंपरिक मिलेट्स को शामिल किया जाए, तो शरीर को प्राकृतिक पोषण मिलेगा और डॉक्टरों पर निर्भरता कम होगी।
उन्होंने किसानों को पारंपरिक और स्थानीय फसलों की ओर लौटने की सलाह देते हुए कहा कि ये फसलें स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ कम लागत में बेहतर मुनाफा भी देती हैं।
कार्यक्रम के तहत कलेक्टर परिसर में एक मिलेट प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें कोदो और कुटकी से बने विभिन्न पौष्टिक और मूल्यवर्धित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इसके जरिए किसानों को यह बताया गया कि मिलेट्स से सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि विभिन्न उत्पाद बनाकर बाजार में अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है। जिले भर से आए किसानों ने इस पहल की सराहना की और मिलेट उत्पादन को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
डॉ. खादर वली ने कहा कि गेहूं और चावल पर अत्यधिक निर्भरता छोड़कर ज्वार, बाजरा और रागी जैसे सुपरफूड अपनाना समय की जरूरत है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य और खेती दोनों के लिए टिकाऊ समाधान बताया। प्रशासन की इस पहल से खानपान में सकारात्मक बदलाव के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
किसान लालराम चंद्राकर ने आईएएनएस से बातचीत में जिला प्रशासन और कृषि विभाग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ. खादर वली द्वारा दी गई जानकारी बेहद उपयोगी है।
लालराम ने बताया कि पहले मोटे अनाज लोगों के रोज़मर्रा के भोजन का हिस्सा थे, जिससे लोग स्वस्थ रहते थे। उन्होंने कहा कि यदि आज फिर से मोटे अनाजों को अपनाया जाए, तो कई बीमारियों से बचाव संभव है। एक किसान के रूप में उन्होंने बताया कि वे स्वयं मोटे अनाज की खेती करते हैं और अब अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। (With inputs from IANS)


