नई दिल्ली- बढ़ती उम्र के साथ बुज़ुर्गों में कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं देखने को मिलती हैं। इन्हीं में से दो अहम समस्याएं हैं शारीरिक कमजोरी (फ्रेल्टी) और डिप्रेशन। हालिया शोध में सामने आया है कि अगर किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति में ये दोनों स्थितियां एक साथ मौजूद हों, तो उनमें डिमेंशिया होने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है।

एक नई स्टडी के अनुसार, फ्रेल्टी और डिप्रेशन मिलकर डिमेंशिया के कुल जोखिम का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा बन सकते हैं। यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल General Psychiatry में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जहां फ्रेल्टी और डिप्रेशन अलग-अलग भी डिमेंशिया का खतरा बढ़ाते हैं, वहीं दोनों का एक साथ होना इस जोखिम को तीन गुना से भी ज्यादा कर देता है।

यह अध्ययन चीन की Zhejiang University School of Medicine के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। इसके लिए अमेरिका और ब्रिटेन के दो लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें UK Biobank के आंकड़े भी शामिल थे। करीब 13 साल तक प्रतिभागियों का फॉलो-अप किया गया, इस दौरान 9,088 लोगों में डिमेंशिया का पता चला।

शोध में यह सामने आया कि जिन बुज़ुर्गों में शारीरिक कमजोरी थी, उनमें डिमेंशिया का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में करीब 2.5 गुना अधिक था। वहीं, जो लोग डिप्रेशन से जूझ रहे थे, उनमें यह जोखिम लगभग 60 प्रतिशत ज्यादा पाया गया। लेकिन सबसे चिंताजनक स्थिति उन लोगों की रही, जिनमें फ्रेल्टी और डिप्रेशन दोनों मौजूद थे। ऐसे लोगों में डिमेंशिया विकसित होने की संभावना सबसे अधिक देखी गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रेल्टी केवल शारीरिक कमजोरी नहीं है, बल्कि यह शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता में कमी का संकेत भी देती है। वहीं, डिप्रेशन दिमाग के कामकाज, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर गहरा असर डाल सकता है। जब ये दोनों समस्याएं एक साथ होती हैं, तो मस्तिष्क पर उनका संयुक्त प्रभाव डिमेंशिया के खतरे को और बढ़ा देता है।

शोधकर्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि अगर बुज़ुर्गों में समय रहते शारीरिक कमजोरी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर ली जाए, तो डिमेंशिया के खतरे को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है, जिसमें केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की भी समान रूप से जांच होनी चाहिए।

अध्ययन यह भी संकेत देता है कि बुज़ुर्गों की देखभाल में संतुलित आहार, नियमित हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि, सामाजिक जुड़ाव और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद अहम है। इन उपायों से न केवल जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है, बल्कि गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।(With Inputs From IANS)

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एक नई स्टडी के मुताबिक, शारीरिक कमजोरी (फ्रेल्टी) और डिप्रेशन अगर साथ-साथ मौजूद हों तो बुज़ुर्गों में डिमेंशिया का खतरा तीन गुना से भी ज़्यादा हो सकता है। दोनों
Dr. Bhumika Maikhuri
Dr. Bhumika Maikhuri

Dr Bhumika Maikhuri is a Consultant Orthodontist at Sanjeevan Hospital, Delhi. She is also working as a Correspondent and a Medical Writer at Medical Dialogues. She completed her BDS from Dr D Y patil dental college and MDS from Kalinga institute of dental sciences. Apart from dentistry, she has a strong research and scientific writing acumen. At Medical Dialogues, She focusses on medical news, dental news, dental FAQ and medical writing etc.