स्तन दूध पंप करना, एक सुविधाजनक तरीका हैं जिससे माँ अपने बच्चे को सीधे स्तनपान न करा पाने पर भी, अपना पौष्टिक दूध दे सकती हैं| यह तरीका बच्चे के पोषण को बनाए रखता है और माँ के दूध बनने की प्रक्रिया को भी सक्रिय रखता है।

स्तन दूध पंप करना क्या है और इसकी ज़रूरत क्यों पड़ती है?

कई बार ऐसा होता है जब माँ बच्चे को सीधे स्तनपान नहीं करा पाती या किसी कारण से स्तनपान न कराने का निर्णय लेती है। ऐसे समय में स्तन दूध पंप करके निकाला जाता है, ताकि बच्चे को वही पौष्टिक माँ का दूध बाद में पिलाया जा सके। यह तरीका बच्चे के पोषण और माँ के दूध उत्पादन—दोनों के लिए सहायक होता है।

स्तन दूध निकालने (पंप करने) के कितने तरीके होते हैं?

स्तन दूध निकालने के मुख्य रूप से तीन आसान तरीके होते हैं।

• पहला, हाथ से हल्के-हल्के दबाकर और मालिश करके दूध निकालना।

• दूसरा, हाथ से चलने वाला मैनुअल पंप।

• तीसरा, बिजली से चलने वाला इलेक्ट्रिक पंप।

शुरुआत में दूध थोड़ा कम निकल सकता है, लेकिन कुछ दिनों में शरीर ज़्यादा दूध बनाने लगता है।

स्तन दूध पंप करना कब शुरू करना चाहिए?

अधिकतर मामलों में बच्चे के जन्म के बाद जल्द ही पंप करना शुरू किया जा सकता है, लेकिन सही समय के लिए डॉक्टर या स्तनपान विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी है।

• यदि बच्चा स्तनपान कर रहा है, तो स्तनपान के बाद पंप करना उपयोगी होता है; खासतौर पर जब बच्चा समय से पहले जन्मा हो या ठीक से स्तन से न लग पा रहा हो।

• जब माँ बच्चे से दूर हो, तो हर 2–3 घंटे में लगभग 15 मिनट तक पंप करना चाहिए।

• यदि बच्चे को बोतल से दूध दिया जा रहा है, तो उसी समय के आसपास पंप करना बेहतर रहता है।

शराब पीने या किसी मेडिकल प्रक्रिया के बाद पंप कब करना चाहिए?

यदि माँ ने शराब पी है, तो कम से कम 2 घंटे बाद ही पंप करना चाहिए। यदि किसी ऐसी प्रक्रिया से गुजरना हो जिसमें बेहोश करने वाली दवाएँ (एनेस्थीसिया) दी जाती हैं, तो पंप करने के समय के बारे में पहले डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है।

पंप करने से पहले कैसे तैयारी करें?

पंप करने से पहले मन और शरीर को शांत रखना ज़रूरी होता है, क्योंकि इससे दूध उतरने की प्रक्रिया आसान होती है। इसके लिए बच्चे की फोटो या वीडियो देखना, बच्चे की चादर या कपड़ों की खुशबू लेना, शांत और निजी जगह पर बैठना मददगार हो सकता है।

स्तनों पर गुनगुना, हल्का गीला कपड़ा रखना, हल्की मालिश करना, सुकून देने वाला संगीत सुनना, पानी पीना और हल्का नाश्ता करना भी लाभकारी होता है।

स्तन दूध पंप करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

स्तन दूध पंप करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:

• पंप करने से पहले कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोना चाहिए|

• यदि साबुन-पानी उपलब्ध न हो, तो हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग किया जा सकता है।

• ऐसे कपड़े पहनें जिनसे स्तनों तक आसानी से पहुँच हो।

• यदि संभव हो, तो दोनों स्तनों से एक साथ दूध निकालें।

• दूध सीधे साफ बोतल या संग्रहण कंटेनर में निकालें।

• निकोटीन या तंबाकू से जुड़े किसी भी उत्पाद का उपयोग न करें—चाहे वह सिगरेट हो, तंबाकू हो या वेपिंग।

सही ब्रेस्ट पंप कैसे चुनें?

पंप का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि माँ कितनी बार पंप करेगी और उसे कितना आराम चाहिए।

• मैनुअल पंप बिना बिजली के चलता है, सस्ता होता है, लेकिन इस्तेमाल में थोड़ा कठिन हो सकता है। यह कभी-कभार पंप करने के लिए उपयुक्त है।

• इलेक्ट्रिक पंप महँगा होता है, लेकिन उपयोग में आसान होता है और अधिक दूध निकाल सकता है।

यदि बच्चा समय से पहले जन्मा हो, बीमार हो, या माँ ज़्यादातर पंपिंग ही कर रही हो, तो अस्पताल-स्तरीय इलेक्ट्रिक पंप की सलाह दी जाती है।

ब्रेस्ट पंप की सफ़ाई और देखभाल कैसे करें?

हर बार उपयोग के बाद पंप की सफ़ाई ज़रूरी है।

• पंप के बिजली वाले हिस्से को केवल सूखे कपड़े से पोंछें—उसे पानी में न डालें।

• प्लास्टिक के हिस्सों को साबुन और गुनगुने पानी से धोएँ या यदि सुरक्षित हो तो डिशवॉशर में साफ करें।

• हिस्सों को हवा में सूखने दें, तौलिये से न पोंछें।

• दिन में कम से कम एक बार पंप के हिस्सों को सैनिटाइज़ करना चाहिए, खासकर यदि बच्चा समय से पहले जन्मा हो, 2 महीने से छोटा हो या उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो।

पंप की ट्यूब के बारे में क्या जानना ज़रूरी है?

अगर पंप की ट्यूब में दूध नहीं जाता, तो उसे रोज़ धोने की ज़रूरत नहीं होती।

अगर ट्यूब में पानी दिखे, तो पंप चलाकर उसे सुखा लें।

अगर ट्यूब में फफूँद लग जाए, तो उसे तुरंत बदल दें।

किन परिस्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि पंपिंग को लेकर निराशा हो रही हो या लगातार दर्द हो रहा हो, तो मदद लेना ज़रूरी है।

• यदि स्तनों में अत्यधिक दर्द, लंबे समय तक भरा रहना, निप्पल में दरार, खून आना या कोई सुधार न हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

• यदि बुखार, निप्पल से पस जैसा स्राव, या स्तनों में लाल, गर्म और दर्दनाक हिस्से संक्रमण के संकेत हो सकते हैं—ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

मदद माँगना कमजोरी क्यों नहीं है?

स्तन दूध पंप करना एक ऐसी प्रक्रिया हैं जिसमें हर माँ का अनुभव अलग होता है। यदि किसी भी स्तर पर परेशानी, दर्द या भ्रम हो, तो डॉक्टर या स्तनपान विशेषज्ञ से समय रहते सलाह लेना सबसे सही कदम है। सही जानकारी और सही सहयोग से माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रह सकते हैं।

breastfeedingnutritional valuebreast pump

Topic:

स्तन दूध पंप करना, एक सुविधाजनक तरीका हैं जिससे माँ अपने बच्चे को सीधे स्तनपान न करा पाने पर भी, अपना पौष्टिक दूध दे सकती हैं|
Neena Tuli
Neena Tuli