स्ट्रोक के लक्षणों को न करें नजरअंदाज, 'बचाव' फॉर्मूला से बनेगी बात

नई दिल्ली: स्ट्रोक, जिसे आमतौर पर ब्रेन अटैक भी कहा जाता है, एक बेहद गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्या है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह अचानक रुक जाता है या कम हो जाता है। रक्त की आपूर्ति बाधित होने से मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे वे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रोक के मामलों में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि जितनी जल्दी इलाज शुरू होता है, मरीज के ठीक होने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) लोगों को सलाह देता है कि स्ट्रोक के लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान और तुरंत उपचार से कई मामलों में जान बचाई जा सकती है और गंभीर नुकसान से बचाव संभव है। इसी उद्देश्य से एनएचएम ने स्ट्रोक के लक्षणों को आसानी से पहचानने के लिए एक सरल और प्रभावी तरीका बताया है, जिसे ‘बचाव’ फॉर्मूला कहा जाता है।
स्ट्रोक के मामलों में देरी का मतलब मस्तिष्क को स्थायी नुकसान हो सकता है। इसलिए यदि लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है। समय रहते मरीज को क्लॉट-बस्टिंग दवाएं या अन्य जरूरी चिकित्सा उपचार दिया जा सकता है, जिससे रिकवरी की संभावना बेहतर हो जाती है।
‘बचाव’ फॉर्मूला स्ट्रोक के प्रमुख संकेतों को याद रखने का एक आसान तरीका है। इसमें हर अक्षर एक महत्वपूर्ण लक्षण को दर्शाता है।
‘ब’ का मतलब है बाजू (बाहों में कमजोरी)। यदि किसी व्यक्ति से दोनों हाथ ऊपर उठाने को कहा जाए और एक हाथ नीचे गिर जाए या कमजोर महसूस हो, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
‘च’ का अर्थ है चेहरा। यदि व्यक्ति को मुस्कुराने के लिए कहा जाए और उसके चेहरे का एक हिस्सा ढीला या असमान दिखाई दे, तो इसे गंभीर संकेत माना जाना चाहिए।
‘आ’ का मतलब है आवाज। यदि व्यक्ति को कोई सरल वाक्य बोलने या दोहराने के लिए कहा जाए और उसकी आवाज अस्पष्ट, तुतलाती हुई या बोलने में कठिनाई हो, तो यह भी स्ट्रोक का लक्षण हो सकता है।
‘व’ का मतलब है वक्त। यदि ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी दिखाई दे, तो समय बिल्कुल भी बर्बाद न करें। तुरंत 108 पर कॉल कर एम्बुलेंस बुलाएं और मरीज को ऐसे नजदीकी अस्पताल ले जाएं, जहां सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों, जैसे जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रोक के लक्षण अक्सर अचानक दिखाई देते हैं और आमतौर पर शरीर के एक हिस्से को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा अचानक संतुलन बिगड़ना, आंखों के सामने धुंधलापन आना या अचानक तेज सिरदर्द होना भी स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं।
स्ट्रोक को अक्सर “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है, क्योंकि यह कई बार बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के भी हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बचाव’ फॉर्मूला के जरिए 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में स्ट्रोक के लक्षणों की समय रहते पहचान संभव है।
स्ट्रोक से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना चाहिए। साथ ही धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से बचना, नियमित व्यायाम करना और संतुलित आहार लेना भी स्ट्रोक के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। (With inputs from IANS)


