पारस हेल्थ के सभी अस्पतालों में 1 साल के अंदर 20000 से ज्यादा कैंसर मरीजों का इलाज किया गया।

दिल्ली-एनसीआर: विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर पारस हेल्थ ने एक ऑन्कोलॉजी डाटा रिलीज किया है जिसमें यह बताया गया है कि जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच में 20,000 से ज्यादा नए कैंसर मरीजों को डायग्नोज किया गया और उनका इलाज किया गया।
ये आंकड़े भारत हेल्थ केदिल्ली-एनसीआर , पटना, पंचकुला, कानपुर, उदयपुर, श्रीनगर,रांची और दरभंगा के अस्पतालों से लिए गए हैं। इतनी ज्यादा संख्या में कैंसर मरीजों का मिलना भारत में कैंसर के बढ़ते बोझ को दर्शाता है। ये आंकड़े मेट्रोपॉलिटन सेंटर्स और उभरते क्षेत्रों में सुलभ स्पेशलाइज्ड ऑंकोलॉजी केयर की जरूरत को दर्शाते हैं।
पिछले 3 सालों में पारस हेल्थ नेटवर्क के अस्पतालों में कैंसर के मामलों में साल-दर-साल लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। 2024 के बाद ज़्यादा तेज़ी से मामलों में बढ़ोतरी हुई है। जहाँ बड़े सेंटर ज़्यादा मरीज़ों को संभाल रहे हैं, वहीं नए क्षेत्रों के अस्पतालों ने भी लगातार कैंसर मामलों में वृद्धि दर्ज की है।
इस वृद्धि के पीछे का कारण बेहतर डायग्नोस्टिक क्षमताएं, मज़बूत रेफरल सिस्टम और कैंसर का जल्दी पता लगाने के बारे में बढ़ती जागरूकता है। कैंसर 40 से 70 साल की उम्र के लोगों में सबसे ज़्यादा होता है, जिसमें मरीज़ों की औसत उम्र 50 से 60 साल के बीच होती है। हालांकि डॉक्टर अब कम उम्र के वयस्कों में भी कैंसर के ज़्यादा मामले देख रहे हैं।
पिछले एक दशक में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे ज्यादा इलाज किया जाने वाला कैंसर बन गया है। ब्रेस्ट कैंसर ने महिलाओं में कैंसर होने के मामले में सर्वाइकल कैंसर को पीछे छोड़ दिया है। वहीं भारत में तंबाकू से जुड़े सिर और गर्दन के कैंसर अभी भी बहुत ज़्यादा हैं।
इन नतीजों पर टिप्पणी करते हुए FICCI हेल्थ एंड सर्विसेज़ के को-चेयर और पारस हेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर, डॉ. धर्मिंदर नागर ने कहा, “अब कैंसर के ज़्यादा मामले बदलती लाइफस्टाइल और बेहतर जांच की वजह से सामने आ रहे हैं।
वहीं तंबाकू का इस्तेमाल, मोटापा, प्रदूषण और सुस्त आदतें कैंसर के मामलों को बढ़ा रही हैं, लेकिन ज़्यादा जागरूकता और समय पर जांच से कैंसर की पहचान जल्दी हो पा रही है। कैंसर की जल्दी पहचान होने से इलाज के नतीजे काफी बेहतर होते हैं। यह बचाव के लिए स्क्रीनिंग और शुरुआती इलाज के महत्व को बताता है।”
पारस हेल्थ नेटवर्क के डॉक्टरों का मानना है कि कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी की वजह लाइफस्टाइल और पर्यावरण से जुड़े फैक्टर हैं। धूम्रपान और बिना धूम्रपान वाले तंबाकू का इस्तेमाल, शराब, मोटापा, खराब खाने की आदतें, शारीरिक गतिविधि की कमी, और हवा में प्रदूषण, केमिकल और कीटनाशकों के संपर्क में आना, साथ ही HPV और हेपेटाइटिस जैसे इन्फेक्शन भी कैंसर के मामलों को बढ़ा रहे हैं।
कैंसर के बारे में लगातार यह गलतफहमी बनी हुई है कि कैंसर लाइलाज है। लोगों में मान्यता है कि यह बायोप्सी या सर्जरी जैसी प्रक्रियाओं से बीमारी फैलती है, लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट इस बात पर ज़ोर देते हैं कि शुरुआती स्टेज के कैंसर अक्सर ठीक हो जाते हैं।
इलाज में हुई तरक्की - जिसमें टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, मिनिमली इनवेसिव और रोबोटिक सर्जरी, और बेहतर कीमोथेरेपी प्रोटोकॉल शामिल हैं, ने कैंसर इलाज के नतीजों और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार किया है। पारस हेल्थ अपने अस्पतालों में मल्टीडिसिप्लिनरी और मरीज़-केंद्रित कैंसर देखभाल देना जारी रखे हुए है। हॉस्पिटल शुरुआती पहचान, वैज्ञानिक इलाज और लगातार सार्वजनिक जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर देता है।


