नई दिल्ली: जनवरी को ‘सर्वाइकल हेल्थ अवेयरनेस मंथ’ के रूप में मनाया जाता है, ताकि महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके। भारत में इस कैंसर के कारण हर आठ मिनट में एक महिला की मौत होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीनेशन, समय पर स्क्रीनिंग और प्रारंभिक इलाज बेहद जरूरी हैं। यह कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से (सर्विक्स) में होता है और इसका प्रमुख कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) का संक्रमण है। हालांकि, एचपीवी संक्रमण का मतलब कैंसर नहीं है, लेकिन नियमित टेस्टिंग और स्क्रीनिंग से प्रारंभिक बदलाव पता लग सकता है।

एम्स दिल्ली के आईआरसीएच में प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सुजाता पाठक ने कहा, “सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे आम हैं। भारत में हर आठ मिनट में एक महिला इसकी वजह से मरती है। समय पर स्क्रीनिंग और सही उम्र में वैक्सीनेशन से इसे 100 प्रतिशत रोका जा सकता है।”

गाइनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. राहुल डी. मोदी ने बताया, “सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम आधुनिक चिकित्सा में सबसे सफल उदाहरणों में से एक है। यह मुख्य रूप से हाई-रिस्क एचपीवी के लगातार संक्रमण से होता है। वैक्सीनेशन, स्क्रीनिंग और शुरुआती इलाज इसे काफी हद तक रोक सकते हैं।”

विशेषज्ञों ने चेताया कि जागरूकता की कमी के कारण भारत में इस बीमारी का बोझ बढ़ रहा है। पाठक ने बताया कि एचपीवी वैक्सीन 2006 से उपलब्ध है, लेकिन जागरूकता कम है। हाल ही में डब्ल्यूएचओ ने सर्वाइकल कैंसर को बड़ी पब्लिक हेल्थ प्रॉब्लम घोषित किया है, जिससे जागरूकता बढ़ी है।

डॉ. मोदी ने कहा, “किशोरावस्था में यौन गतिविधि शुरू होने से पहले एचपीवी वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है। यह सबसे अधिक कैंसरजनक एचपीवी टाइप से बचाकर ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर के मामलों को रोक सकता है। वैक्सीनेशन एचपीवी संक्रमण, प्री-कैंसर घाव और भविष्य के कैंसर के मामलों को कम करता है।”

एचपीवी वैक्सीन सुरक्षित है और सामान्यतः केवल हल्का दर्द, लालिमा या थोड़ी बुखार जैसी मामूली साइड इफेक्ट्स होते हैं। 9-14 साल की लड़कियों को दो डोज की जरूरत होती है, जबकि इससे अधिक उम्र में तीन डोज की आवश्यकता होती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, एक डोज भी 20 साल तक सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

इसके अलावा, पीरियड्स के दौरान स्वच्छता बनाए रखना और पूरी इम्यूनिटी बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। लगभग 90% मामलों में, एचपीवी संक्रमण दो साल के भीतर खुद ठीक हो जाता है।

स्क्रीनिंग भी बेहद जरूरी है। पैप स्मीयर और एचपीवी डीएनए टेस्टिंग से सर्विक्स में कैंसर से पहले होने वाले बदलावों का पता चलता है। एम्स दिल्ली ने सर्वाइकल कैंसर के लिए एक महीने की फ्री स्क्रीनिंग भी शुरू की है।

पाठक ने कहा, “कैंसर बनने में आमतौर पर 15-20 साल लगते हैं, जिससे स्क्रीनिंग और इलाज के लिए पर्याप्त समय होता है। सही समय पर स्क्रीनिंग से कैंसर से पहले बदलाव पता लग सकते हैं।”

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण देर से दिखाई देते हैं। इनमें मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग, पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग, अत्यधिक व्हाइट डिस्चार्ज, पेट या कमर में दर्द शामिल हो सकते हैं। पाठक ने चेताया कि ये लक्षण हमेशा कैंसर नहीं होते, लेकिन इन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। (With inputs from IANS)

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वैक्सीनेशन, जांच और उपचार से सर्वाइकल कैंसर पर काबू पाया जा सकता है।
Priya Gupta
Priya Gupta

Priya Gupta brings over six years of dynamic journalism experience from leading Indian news agencies, including NDTV, News Nation, and Zee News. TV9 Bharatvarsh A seasoned reporter, she has covered key beats like politics, education, jobs, and international relations, delivering insightful analysis on national and global issues. Priya now drives coverage at health dailogues managing news updates in the health sector. She handles media outreach, develops press releases, spotlights healthcare professionals and institutions, and leads health awareness initiative