नई दिल्ली: एक नई स्टडी के अनुसार, हार्ट सर्जरी का समय मरीज की रिकवरी और सर्वाइवल रेट को प्रभावित कर सकता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन में 90,000 से अधिक हार्ट सर्जरी के डेटा का विश्लेषण किया और पाया कि सुबह 10 से 12 बजे के बीच की सर्जरी में दिल से संबंधित मौत का जोखिम सुबह 7 से 10 बजे की तुलना में 18% अधिक हो सकता है।

स्टडी में यह भी सामने आया कि दोपहर या शाम को होने वाली सर्जरी में मरीजों को कम जटिलताएं हुईं, जैसे हार्ट फेलियर या मायोकार्डियल इंफार्क्शन। शोधकर्ताओं का मानना है कि बॉडी क्लॉक (सर्कैडियन रिदम) और हार्ट टिशू की रिकवरी क्षमता दिन के समय के अनुसार बदलती है, जिससे दोपहर में सर्जरी अधिक सुरक्षित साबित हो सकती है। हालांकि, कुछ अन्य स्टडीज़ में समय के आधार पर कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया।

दोपहर का समय इसलिए सही माना गया क्योंकि लोगों की बॉडी क्लॉक अलग-अलग होती है; कुछ सुबह जल्दी जागते हैं और कुछ रात में देर तक जागते हैं।

इंग्लैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड में 24,000 से अधिक मरीजों वाले राष्ट्रीय डेटासेट का विश्लेषण कर इस निष्कर्ष तक पहुंचा गया। हालांकि, दिन के समय का कॉम्प्लिकेशन रेट और पुनः भर्ती होने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, फिर भी ये नतीजे हार्ट सर्जरी शेड्यूल करने के सबसे उपयुक्त समय पर सवाल उठाते हैं।

जर्नल एनेस्थीसिया में प्रकाशित यह स्टडी यह भी बताती है कि सर्जरी पर बॉडी क्लॉक — हमारे शरीर की 24 घंटे की बायोलॉजिकल साइकिल — का संभावित प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के क्लिनिकल सीनियर लेक्चरर और मुख्य लेखक डॉ. गैरेथ किचन ने कहा, “यह रिसर्च दिखाती है कि जब हार्ट सर्जरी सुबह देर से शुरू होती है, तो दिल से जुड़ी मौत का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है। सर्जरी के समय में छोटे बदलाव भी मरीजों के लिए बड़े फायदेमंद हो सकते हैं।”

डॉ. किचन ने यह भी कहा कि लोगों की बॉडी क्लॉक और व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए सर्जरी का समय तय किया जाना चाहिए। (With inputs from IANS)

IANSheart surgerymorning surgery

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स्टडी में खुलासा: दोपहर में होने वाली हार्ट सर्जरी के परिणाम सुबह की तुलना में बेहतर और जोखिम कम हो सकते हैं।
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.