नई दिल्ली: होली का त्योहार, जो 4 मार्च को मनाया जाएगा, रंगों और खुशियों से भरा होता है। यह बसंत ऋतु की शुरुआत और फसल कटाई का जश्न मनाने का अवसर भी है। इस दौरान लोग एक-दूसरे पर लाल, नीला, पीला और अन्य रंग डालकर उत्सव का आनंद लेते हैं। लेकिन बाजार में मिलने वाले ज्यादातर रंग रासायनिक होते हैं, जिनमें धातु के कण, कांच के टुकड़े और हानिकारक केमिकल मौजूद होते हैं। ये रंग त्वचा पर एलर्जी, जलन, आंखों में इरिटेशन और लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

सरकार के माई गवर्मेंट पोर्टल के अनुसार, रासायनिक रंग न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा हैं। इन्हें प्राकृतिक रूप से विघटित होने में काफी समय लगता है, जिससे पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ऐसे में स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा के लिए घर पर प्राकृतिक सामग्री से रंग तैयार करना सबसे सुरक्षित और बेहतर विकल्प है। प्राकृतिक रंग बच्चों के लिए भी सुरक्षित होते हैं और त्वचा पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं डालते। ये रंग आसानी से किचन और बगीचे में उपलब्ध चीजों से बन सकते हैं।

लाल रंग के लिए चुकंदर सबसे आसान और गहरा रंग देता है। 2-3 चुकंदर को छीलकर कद्दूकस करें, पानी में उबालें या ब्लेंडर में पीसकर रस निकालें। इस रस को छानकर सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है। सूखा गुलाल बनाने के लिए इसमें कॉर्नस्टार्च या आटा मिलाकर धूप में सुखाया जा सकता है। इसके अलावा लाल गुड़हल या लाल गुलाब की पंखुड़ियों को उबालकर भी रंग बनाया जा सकता है। अनार के छिलके या टमाटर का रस भी लाल रंग के विकल्प हैं।

पीला रंग बनाने के लिए हल्दी पाउडर को पानी में मिलाकर उबालें और छान लें। इसे बेसन, कॉर्नस्टार्च या चावल के आटे में मिलाकर पीला गुलाल तैयार किया जा सकता है। गेंदे की पंखुड़ियों को उबालकर भी चमकीला पीला रंग बनाया जा सकता है, जो त्वचा पर सुरक्षित और चमकदार लगता है।

हरा रंग पालक, धनिया या अन्य साग की पत्तियों से प्राप्त किया जा सकता है। पत्तियों को अच्छी तरह धोकर पानी में उबालें और ब्लेंडर में पीसकर रस निकालें। नीम की पत्तियां भी हरे रंग के लिए उपयोगी हैं और इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण भी होते हैं। सूखे गुलाल के लिए रस को कॉर्नस्टार्च में मिलाकर धूप में सुखाया जा सकता है।

गुलाबी रंग के लिए चुकंदर का रस पतला करके हल्का गुलाबी शेड तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा गुलाब की पंखुड़ियां या नयनतारा के फूल उबालकर गुलाबी रंग बनाया जा सकता है। प्याज के छिलकों को उबालने से भी हल्का गुलाबी रंग मिलता है।

नीला रंग बटरफ्लाई पी, विष्णुकांता या जैकरांडा फूलों से प्राप्त किया जा सकता है। इन फूलों को पानी में भिगोकर या उबालकर नीला रंग निकाला जा सकता है। इसे कॉर्नस्टार्च में मिलाकर सूखा गुलाल भी बनाया जा सकता है।

नारंगी रंग के लिए पलाश के फूल या मेहंदी के पत्तों को उबालकर नारंगी रंग तैयार किया जा सकता है। हल्दी और चुकंदर के रस को मिलाकर भी नारंगी शेड बनाया जा सकता है।

इस प्रकार, प्राकृतिक रंग बनाने के लिए घर पर आसानी से उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन रंगों में कोई हानिकारक केमिकल नहीं होता और यह स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए सुरक्षित हैं। घर पर प्राकृतिक रंग बनाकर होली खेलना न केवल त्योहार को खुशियों से भर देता है, बल्कि इसे सुरक्षित और हरा-भरा भी बनाता है। (With inputs from IANS)

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Topic:

होली 2026 में स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए केमिकल रंगों की बजाय घर पर बने प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करें।
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.