मिनी स्ट्रोक (TIA), इसे मामूली समझने की भूल पड़ सकती है भारी, जानें चेतावनी के संकेत

अक्सर लोग अचानक आई कमजोरी या धुंधलेपन को थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन चिकित्सा जगत में इसे 'मिनी स्ट्रोक' या ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) कहा जाता है. हैदराबाद स्थित अपोलो अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार के अनुसार, ये एपिसोड कोई मामूली घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी हैं.
क्या होता है मिनी स्ट्रोक (TIA)?
जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह कुछ समय के लिए रुक जाता है और फिर अपने आप बहाल हो जाता है, तो उसे मिनी स्ट्रोक कहते हैं। इसके लक्षण जैसे—हाथों में कमजोरी, बोलने में लड़खड़ाहट या चक्कर आना—महज कुछ मिनटों में गायब हो सकते हैं। लक्षणों के खत्म होने पर लोग राहत महसूस करते हैं, जबकि असल में यह आने वाले बड़े खतरे का संकेत है.
इसे नजरअंदाज करना जानलेवा क्यों है?
डॉ. सुधीर कुमार इसे एक ऐसी 'छोटी आग' की तरह बताते हैं जो खुद बुझ गई हो। जैसे हम आग बुझने के बाद भी वायरिंग चेक करते हैं ताकि बड़ा हादसा न हो, वैसे ही मिनी स्ट्रोक के बाद जांच जरूरी है. आंकड़े बताते हैं कि TIA का अनुभव करने वाले 10 में से 1 व्यक्ति को अगले 48 घंटों के भीतर एक बड़ा और गंभीर स्ट्रोक पड़ सकता है.
इसे तनाव या नींद की कमी मानकर टालना जीवन भर की विकलांगता का कारण बन सकता है. तुरंत जांच से डॉक्टर धमनियों में रुकावट या रक्त के थक्कों (Clots) का पता लगाकर सही समय पर इलाज शुरू कर सकते हैं.
BE FAST: इन संकेतों को कभी न भूलें
B (Balance - संतुलन): अचानक चलने में परेशानी या चक्कर आना.
E (Eyes - आँखें):दृष्टि में बदलाव या अचानक धुंधलापन.
F (Face - चेहरा): चेहरे का एक तरफ झुक जाना या सुन्न पड़ना.
A (Arms - हाथ): हाथों में कमजोरी या भारीपन महसूस होना.
S (Speech - बोली): बोलने में दिक्कत या शब्दों का लड़खड़ाना.
T (Time - समय): समय बहुत कीमती है,लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचें.
S – स्पीच: बोलने में दिक्कत या कन्फ्यूजन.
T – टाइम: तुरंत मदद के लिए कॉल करें.


