हल्के में न ले सफेद जीभ की परेशानी, देती है शरीर की आंतरिक बीमारियों का संकेत

नई दिल्ली: जीभ केवल स्वाद की पहचान करने का अंग नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर में चल रही कई आंतरिक बीमारियों का संकेत भी देती है। आयुर्वेद में माना गया है कि जीभ पर सफेद या पीली परत जमा होना शरीर में “आम” यानी विषैले पदार्थों के जमा होने का संकेत है। आम तब बनता है जब शरीर से हानिकारक तत्व बाहर नहीं निकल पाते और पेट की पाचन क्षमता धीमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप भोजन पेट में सड़ने लगता है और कब्ज, गैस, अपच, पेट दर्द जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
सिर्फ पेट की समस्याएँ ही नहीं, बल्कि समय के साथ यह खून को भी गंदा कर सकता है और गठिया, डायबिटीज़, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों की नींव रख सकता है। इसलिए सुबह उठते ही जीभ की सफेद या पीली परत पर ध्यान देना आवश्यक है।
आयुर्वेद में आम को कम करने के कई उपाय बताए गए हैं। पहला उपाय इंटरमिटेंट फास्टिंग है। इसके अंतर्गत रोजाना 14-16 घंटे का उपवास रखा जाता है। उदाहरण के लिए, शाम 6-7 बजे तक भोजन कर लें और अगले दिन 10-11 बजे पहला मील लें। इस दौरान भूख लगने पर हल्के पेय पदार्थ लिए जा सकते हैं। यह पेट को सफाई का पूरा समय देता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है।
दूसरा उपाय है जीरा, धनिया और सौंफ का काढ़ा, जिसे बराबर मात्रा में पानी में उबालकर दिनभर थोड़ा-थोड़ा पीने से शरीर के अंदर जमा विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं और पाचन बेहतर होता है।
तीसरा उपाय है अग्निसार क्रिया, जो योग की सबसे शक्तिशाली क्रियाओं में से एक मानी जाती है। यह खाली पेट की जाती है और पेट को अंदर की ओर पंप करके शरीर में जमा आम को धीरे-धीरे बाहर निकालती है।
इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दिनभर ठंडा पानी न पिएं। ठंडा पानी शरीर में टॉक्सिन जमा करने और कब्ज बढ़ाने में मदद करता है। इसके बजाय हल्का गुनगुना पानी पिएं, जो शरीर और पाचन के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प है।
इस प्रकार, जीभ की सफेद या पीली परत को हल्के में न लेना चाहिए। यह न केवल पाचन और पेट की समस्याओं की चेतावनी है, बल्कि पूरे शरीर के स्वास्थ्य का संकेत भी देती है। नियमित उपाय अपनाकर और सही जीवनशैली अपनाकर हम इन आंतरिक बीमारियों से बच सकते हैं और स्वस्थ जीवन सुनिश्चित कर सकते हैं। (With inputs from IANS)


