त्रिदोष के असंतुलन का संकेत देती है जीभ, रंग से पहचाने शरीर के विकार

नई दिल्ली: जब भी हमारा शरीर किसी वायरल संक्रमण या किसी अन्य बीमारी से प्रभावित होता है, तो डॉक्टर अक्सर सबसे पहले आंखों और जीभ की जांच करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसका कारण क्या है? आयुर्वेद के अनुसार, जीभ शरीर का एक अहम आईना होती है, जो अंदरूनी स्वास्थ्य और शरीर में हो रही गड़बड़ियों का संकेत देती है। जीभ के रंग, आकार और बनावट में होने वाले बदलाव से यह पता लगाया जा सकता है कि शरीर में कौन से दोष बढ़ रहे हैं और किन अंगों पर असर पड़ रहा है।
यदि किसी व्यक्ति की जीभ बहुत ज्यादा सफेद दिखाई देती है, तो यह शरीर में कफ और आम दोष के बढ़ने का संकेत है। इस स्थिति में आमतौर पर भोजन सही तरह से पच नहीं पाता और शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप जीभ पर सफेद परत जम जाती है। ऐसे समय में पाचन शक्ति को सुधारना बहुत जरूरी होता है।
वहीं, यदि जीभ हल्की लाल या गुलाबी रंग की हो, तो यह पित्त दोष की वृद्धि का संकेत देती है। यह अक्सर तब होता है जब शरीर में गर्मी बढ़ जाती है, जिससे गैस और कब्ज की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके अलावा, हल्की लाल या गुलाबी जीभ विटामिन बी-12 की कमी को भी दर्शा सकती है। इस अवस्था में व्यक्ति को अक्सर कमजोरी महसूस होती है और पेट में एसिड का स्तर बढ़ जाता है।
अगर जीभ का रंग हल्का पीला हो जाता है, तो यह भी स्वास्थ्य में गड़बड़ी का संकेत है। यह स्थिति तब होती है जब शरीर में पित्त और आम दोनों बढ़ जाते हैं। आमतौर पर ये टॉक्सिन आंतों में जमा होते हैं और पूरे शरीर पर असर डालते हैं। पीली जीभ यकृत (लिवर) पर बढ़ रहे दबाव को भी दिखाती है। जब लिवर अपने कार्य जैसे हॉर्मोन का उत्पादन ठीक से नहीं करता, तब भी जीभ हल्की पीली दिखाई देने लगती है।
इसके अलावा, अगर जीभ शुष्क हो तो यह वात दोष की वृद्धि का संकेत देती है। साथ ही, यह रस धातु की कमी की ओर भी इशारा करती है। इस स्थिति में व्यक्ति को बार-बार प्यास लगती है, लेकिन पानी पीने से भी जीभ की सूखापन कम नहीं होता। ऐसे समय में ऑयल पुलिंग की तकनीक अपनाना फायदेमंद साबित हो सकता है, जिससे मुंह के अंदर नमी बनी रहती है और जीभ स्वस्थ रहती है।
इस प्रकार, जीभ का रंग, बनावट और सूखापन शरीर में त्रिदोष की असंतुलन की स्थिति को समझने में मदद करता है। इसके आधार पर समय रहते उचित आहार, पाचन सुधार और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सकता है। (With inputs from IANS)


