होली के बाद त्वचा की सिर्फ बाहरी नहीं, आतंरिक देखभाल भी जरूरी, प्राकृतिक नुस्खे देंगे प्रभावी परिणाम

नई दिल्ली: होली का त्योहार रंगों, उत्साह और खुशियों का प्रतीक माना जाता है, लेकिन यदि सही सावधानी न बरती जाए तो यह त्वचा के लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकता है। बाजार में मिलने वाले कई रंगों में केमिकल तत्व मौजूद होते हैं, जो त्वचा की प्राकृतिक नमी को कम कर देते हैं। इसके कारण त्वचा रूखी, बेजान या परतदार हो सकती है।
खासतौर पर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में लाल चकत्ते, खुजली और एलर्जी जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। इसलिए होली खेलने के दौरान ही नहीं, बल्कि उसके बाद भी त्वचा की सही देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है।
आयुर्वेद के अनुसार त्वचा, जिसे ‘त्वक’ कहा जाता है, केवल शरीर की बाहरी परत नहीं बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य का प्रतिबिंब होती है। यह शरीर को बाहरी संक्रमण और हानिकारक तत्वों से बचाने का कार्य भी करती है। होली के रंगों के संपर्क में आने के बाद त्वचा को विशेष रूप से स्नेहन (मॉइस्चराइजिंग) और शोधन (क्लेंज़िंग) की आवश्यकता होती है, ताकि त्वचा दोबारा स्वस्थ और संतुलित हो सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, रंग हटाने के लिए तुरंत साबुन या केमिकल युक्त फेसवॉश का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा पर रिएक्शन बढ़ सकता है। सबसे पहले चेहरे को साधारण पानी से साफ करें। इसके बाद मक्के का आटा या दरदरे चावल के आटे से हल्के हाथों से स्क्रब करने से त्वचा पर जमा रंग और गंदगी आसानी से निकल जाती है।
त्वचा को ठंडक और आराम देने के लिए मुल्तानी मिट्टी और दही का लेप लगाना लाभकारी माना जाता है। यह त्वचा की जलन कम करने, लालिमा घटाने और रंगत निखारने में मदद करता है। इसके बाद ताजा एलोवेरा जेल लगाने से त्वचा को गहराई से नमी मिलती है और स्किन को राहत मिलती है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि त्वचा की देखभाल केवल बाहरी उपायों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। आंतरिक पोषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शरीर को हाइड्रेट रखने, हल्का और संतुलित भोजन लेने तथा रात में गुनगुना दूध पीने से त्वचा की रिकवरी तेजी से होती है। होली के बाद अत्यधिक तला-भुना भोजन करने से बचना भी त्वचा के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद रहता है।
सही देखभाल अपनाकर आप होली के रंगों का आनंद लेने के साथ अपनी त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रख सकते हैं। (With inputs from IANS)


