गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक के सेवन से शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस रोग का खतरा: शोध

नई दिल्ली – हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन नवजात शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस (GBS) संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकता है। इस शोध ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
सरकार पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि महिलाओं को गर्भावस्था में केवल चिकित्सकीय मार्गदर्शन के तहत ही दवाओं का सेवन करना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी 'मन की बात' में अत्यधिक एंटीबायोटिक उपयोग के बढ़ते रुझान पर चिंता जताई थी।
स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट और बेल्जियम के एंटवर्प विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस विषय पर व्यापक शोध किया। उनके अध्ययन में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन, विशेषकर तीसरी तिमाही के प्रारंभिक चरण में, डिलीवरी से चार सप्ताह पहले तक नवजात शिशुओं में GBS संक्रमण का खतरा बढ़ा देता है। GBS बैक्टीरिया आमतौर पर आंत या जननांग में पाया जाता है और सामान्य परिस्थितियों में यह गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाता।
लेकिन गर्भवती महिलाओं में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव से यह बैक्टीरिया सक्रिय हो सकता है, जिससे नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और शिशु निमोनिया, बुखार या अन्य संक्रमणों का शिकार हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने 2006 से 2016 तक स्वीडन में हुए 1,095,644 जीवित जन्मों का विश्लेषण किया। इनमें से लगभग 24.5 प्रतिशत शिशुओं को जन्म से पहले एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव का सामना करना पड़ा।
अध्ययन ने यह भी दिखाया कि गर्भावस्था की तीसरी तिमाही का प्रारंभिक चरण संवेदनशीलता की एक महत्वपूर्ण अवधि है, जिसमें शिशु के GBS संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह नवजात शिशुओं में GBS रोग के जोखिम और प्रसवपूर्व एंटीबायोटिक संपर्क का सबसे व्यापक और पहला अध्ययन है।
इस शोध का संदेश स्पष्ट है: गर्भवती महिलाओं को एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन केवल चिकित्सक की निगरानी में ही करना चाहिए। इससे न केवल शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि संभावित संक्रमण और रोगों से बचाव भी संभव होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था में जिम्मेदार दवा उपयोग और सही मार्गदर्शन नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। (With inputs from IANS)


