नई दिल्ली: एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मध्य प्रदेश के मंडला जिले में लागू किए गए एग्रोइकोलॉजिकल होमस्टेड मॉडल ने स्थानीय आदिवासी समुदाय की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाया है। इस पहल ने न केवल पिछवाड़े के प्लॉट्स का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया, बल्कि महिलाओं की आय, पोषण और उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि की है।

इको-बिजनेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल सीजीआईएआर मल्टीफंक्शनल लैंडस्केप्स प्रोग्राम और प्रोफेशनल असिस्टेंस फॉर डेवलपमेंट एक्शन (प्रदान) के नेतृत्व में चलाई गई। यह मॉडल अलग-अलग ऊंचाई वाले हिस्सों में विविध प्रकार की सब्जियों की खेती और उपलब्ध जगह का बेहतर उपयोग करने पर केंद्रित है।

इंटरनेशनल वॉटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (IWMI) के आंकड़ों के अनुसार, इस तकनीक के अपनाने के बाद उत्पादन में विविधता 350 प्रतिशत तक बढ़ी है। घरों में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की विविधता दोगुनी हो गई है, जबकि हरी पत्तेदार सब्जियों और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का उपयोग लगभग 70 प्रतिशत बढ़ा है। साथ ही, बैकयार्ड पोल्ट्री से प्रोटीन प्राप्ति में सुधार हुआ है और परिवारों की बाहरी बाजारों पर निर्भरता घट गई है।

इस मॉडल में विविध फसलों की खेती, फसल चक्र का पालन, बायो-कम्पोस्टिंग, वर्षा जल संचयन और ऑर्गेनिक खाद का उपयोग शामिल है। साथ ही, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था में फसल के अवशेषों का इस्तेमाल किया जाता है।

महिला किसानों ने पारंपरिक खेती के तरीकों को चुनौती देते हुए अपने घरों के खेतों में उत्पादन और निर्णय लेने की जिम्मेदारी संभाली है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और परिवारों में पोषण स्तर में सुधार हुआ है।

पहले चिमकाटोला और केवलारी के ज्यादातर किसान मोनोक्रॉपिंग करते थे, जिसमें ऊंचाई वाले खेतों में मक्का और निचले खेतों में चावल उगाया जाता था। लेकिन अब महिला किसान छोटे-छोटे प्लॉट्स पर विविध फसलें उगा रही हैं और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी को दूर कर रही हैं।

प्रोफेशनल असिस्टेंस फॉर डेवलपमेंट एक्शन की टीम के कोऑर्डिनेटर सौरव कुमार ने बताया कि पहले खेती अनियमित बारिश, गलत कृषि तकनीक, खराब मिट्टी और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के कारण असफल रहती थी। इस परियोजना के तहत प्रत्येक महिला किसान लगभग 400-500 स्क्वायर मीटर जमीन पर जैविक उर्वरकों जैसे जीवामृत और पंचगव्य का उपयोग कर खेती करती है।

इस प्रकार, एग्रोइकोलॉजिकल होमस्टेड मॉडल ने मंडला जिले में महिलाओं की आय, पोषण और कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार लाने में मदद की है, और यह स्थानीय समुदाय के लिए एक स्थायी एवं टिकाऊ कृषि समाधान के रूप में उभरा है। (With inputs from IANS)

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मध्य भारत में एग्रोइकोलॉजिकल होमस्टेड से महिलाओं की आय और पोषण में सुधार हुआ।
Khushi Chittoria
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Khushi Chittoria joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Editorial Intern. She holds a degree in Bachelor of Arts in Journalism and Mass Communication from IP University and has completed certifications in content writing. She has a strong interest in anchoring, content writing, and editing. At Medical Dialogues, Khushi works in the editorial department, web stories and anchoring.