क्या खतरनाक है पीरियड का फ्लो कम होना? जानें कब बरतनी चाहिए सावधानी

नई दिल्ली: गर्भाशय महिलाओं के शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जिसका सीधा संबंध उनके संपूर्ण स्वास्थ्य से जुड़ा होता है।
गर्भाशय में हल्की-सी गड़बड़ी भी कई समस्याओं का कारण बन सकती है। इससे थायराइड, शुगर, पीसीओडी, अत्यधिक थकान और बाल झड़ने जैसी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में कई महिलाएं कम पीरियड फ्लो की समस्या का सामना कर रही हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर बार कम फ्लो नुकसानदेह हो।
मासिक धर्म का फ्लो गर्भाशय की अंदरूनी परत, यानी एंडोमेट्रियम लेयर की मोटाई पर निर्भर करता है। यह परत हर महीने गर्भधारण की तैयारी में बनती है और गर्भ न ठहरने पर टूटकर रक्तस्राव के रूप में बाहर निकलती है, जिसे मासिक धर्म कहा जाता है।
यदि एंडोमेट्रियम लेयर पतली बनती है तो रक्तस्राव कम होता है, जबकि मोटी होने पर फ्लो ज्यादा रहता है। हालांकि हर बार कम फ्लो बीमारी का संकेत नहीं होता। यदि हार्मोन संतुलित हैं, पीसीओडी नहीं है, वजन अचानक नहीं घट रहा, अत्यधिक व्यायाम नहीं हो रहा और गर्भाशय में संक्रमण या सर्जरी का इतिहास नहीं है, तो हल्का फ्लो सामान्य माना जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार 21 से 35 दिनों का मासिक चक्र और 2 से 5 दिनों तक रक्तस्राव सामान्य है। लेकिन यदि एक दिन बाद ही रक्तस्राव लगभग बंद हो जाए तो जांच कराना जरूरी है। वहीं 7 दिन से अधिक रक्तस्राव होना भी खतरनाक हो सकता है।
अगर पीरियड अनियमित हों, पेट दर्द बहुत अधिक हो, बार-बार पीरियड मिस हों या गर्भधारण में दिक्कत आ रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। संतुलित आहार, प्रोटीन और आयरन युक्त भोजन, पर्याप्त पानी, हल्का व्यायाम और पूरी नींद मासिक चक्र को संतुलित रखने में मदद करते हैं। (With inputs from IANS)


