मध्य प्रदेश : पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान से मजबूत हो रही मातृ-शिशु सुरक्षा, 40 गर्भवती महिलाओं की निशुल्क जांच

बुरहानपुर: प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिला चिकित्सालय की एएनसी ओपीडी में एक विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर मातृ-शिशु सुरक्षा को सुदृढ़ करना था।
इस शिविर में कुल 40 गर्भवती महिलाओं की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य जांच की गई, जिनमें से 10 महिलाओं को उच्च जोखिम गर्भावस्था के रूप में चिन्हित किया गया। इन महिलाओं को तुरंत आवश्यक उपचार, विशेषज्ञ परामर्श और नियमित निगरानी की सुविधा दी गई, ताकि किसी भी संभावित जटिलता से समय रहते बचाव किया जा सके।
स्थानीय महिला मंगला भगत ने बताया कि इस अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को समय पर टीकाकरण, पोषण और संतुलित आहार के महत्व की जानकारी दी जाती है। साथ ही गर्भावस्था के दौरान आराम, खान-पान और जरूरी सावधानियों को लेकर भी विस्तार से समझाया जाता है।
मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रतिभा बागर ने आईएएनएस को बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत नियमित रूप से ऐसे शिविर आयोजित किए जाते हैं, जिनमें सोनोग्राफी सहित सभी आवश्यक जांचें निःशुल्क की जाती हैं। संभावित जटिलताओं वाली गर्भावस्थाओं की पहले ही पहचान कर उचित इलाज सुनिश्चित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस योजना को खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इसके चलते मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है।
फील्ड ऑफिसर वंदना मिस्सी ने बताया कि यह अभियान पूरी योजना और तैयारी के साथ संचालित किया जाता है। केंद्र सरकार के निर्देशानुसार आयोजित इन शिविरों से गर्भवती महिलाओं में जागरूकता बढ़ी है और सुरक्षित मातृत्व की दिशा में यह एक प्रभावी पहल साबित हो रही है।
शिविर के दौरान महिलाओं और उनके परिजनों को प्रसव पूर्व चार अनिवार्य जांचों, मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका, संस्थागत प्रसव की आवश्यकता तथा सीसीपी, एफसीसी और पीएमएच कार्यक्रमों के तहत उपलब्ध 24 घंटे की निशुल्क सहायता सेवाओं, टोल-फ्री नंबर और टेली-मानस जैसी सुविधाओं की जानकारी भी दी गई।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह अभियान हर माह नियमित रूप से संचालित किया जाता है, जिससे गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, उपचार और निगरानी सुनिश्चित हो सके तथा मातृ-शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी लाई जा सके। (With inputs from IANS)


