मासिक धर्म में भारी रक्तस्राव से परेशान? आयुर्वेद में है इलाज

नई दिल्ली: मासिक धर्म के दौरान होने वाले अत्यधिक या अनियमित रक्तस्राव को मेनोरेजिया कहा जाता है। इसे समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल शारीरिक कमजोरी ही नहीं, बल्कि जीवनशैली और आहार संबंधी आदतों से भी जुड़ा हो सकता है। मेनोरेजिया या असामान्य रक्तस्राव को नियंत्रित करना कठिन नहीं है। सही आहार, स्वच्छता, हल्की व्यायाम दिनचर्या और आयुर्वेदिक घरेलू उपाय इसे नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं।
आयुर्वेद में इसे कंट्रोल करने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे काफी कारगर माने जाते हैं। जैसे कि आंवला का जूस अगर गुनगुना करके गुड़ के साथ दिन में दो बार लिया जाए, तो यह रक्तस्राव को संतुलित करने में मदद करता है। इसी तरह कच्चे केले का पेस्ट गुड़ के साथ सेवन करना या यष्टिमधु यानी मुलेठी का पाउडर चावल के पानी के साथ लेना भी लाभकारी होता है। कुछ लोग अशोका की छाल उबालकर दूध में मिलाकर पीते हैं, जिससे मासिक धर्म का समय नियमित रहता है और खून का बहाव नियंत्रित होता है। इन उपायों को लगभग 1-2 हफ्ते तक लगातार अपनाने की सलाह दी जाती है, या जब तक लक्षण कम नहीं हो जाते।
इसके अलावा खान-पान और जीवनशैली पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। गर्म और पौष्टिक भोजन, हल्का लेकिन संपूर्ण आहार, हरी सब्जियां, फलों, दूध और घी का सेवन करना लाभकारी होता है। महीने के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, कपड़े और सैनिटरी पैड स्वच्छ हों और पानी का इस्तेमाल भी साफ पानी से ही करें। हल्की एक्सरसाइज और घरेलू कामकाज करना शरीर को सक्रिय रखता है और मासिक धर्म के दौरान थकान कम करता है।
मासिक धर्म के दौरान कुछ गुस्सा, तनाव, झगड़ा या ज्यादा शारीरिक श्रम से बचें। हल्की पेट दर्द या शरीर में दर्द के लिए तुरंत दवा लेने की बजाय घरेलू नुस्खे अपनाएं, जैसे कि जीरा पाउडर को गर्म दूध में मिलाकर पीना या दर्द वाली जगह पर हॉट वॉटर बैग रखना। ज्यादा मसालेदार, तैलीय, भारी, खट्टा या नमकीन भोजन से परहेज करें। (With inputs from IANS)


