ग्रेटर नोएडा: फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा के डॉक्टरों ने क्लीनिकल निर्णय और मल्टीडिसीप्लीनरी तालमेल का शानदार परिचय देते हुए, गंभीर किस्म के बोन इंफेक्शन से पीड़ित 9-वर्षीय बच्चे का सफलतापूर्वक उपचार कर उसे नया जीवनदान दिया है।

इस बच्चे का इंफेक्शन इतना बिगड़ चुका था कि मरीज सेप्टिक शॉक में चला गया था और ऐसे में उसे बचाने के लिए अगले 10 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट और इंटेंसिव केयर में रखा गया। इस बच्चे को जब अस्पताल लाया गया तो वह लगातार बुखार, और करीब एक हफ्ते से चलने-फिरने में परेशानी महसूस होने तथा दांए पैर के निचले हिस्से तथा कूल्हे में सूजन और दर्द से जूझ रहा था।

इससे पहले, 4-5 दिनों तक अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करवाने (ओपीडी और आईपीडी) के बावजूद, मरीज की हालत में कोई सुधार होने की बजाय उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी।

फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा में भर्ती के बाद, इस बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई, जबकि उसे दवाएं दी जा रही थीं। उसकी सांस तेज चलने लगी, और हृदय गति भी बढ़ गई जबकि पल्स कमजोर पड़ रही थी और पेशाब की मात्रा कम हो गई थी तथा ब्लड प्रेशर बॉर्डरलाइन पर था।

जांच से पता चला कि उसका इंफेक्शन काफी बढ़ चुका था। विस्तृत जांच में उसके दाएं कूल्हे में ऑस्टियोमायलिटिस (बोन इंफेक्शन) की पुष्टि हुई और जोड़ में मवाद भर चुका था। मरीज को तत्काल पिडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में शिफ्ट किया गया जहां डॉ कुशाग्र गुप्ता, कंसल्टेंट – पिडियाट्रिक्स, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा की देखरेख में इलाज शुरू हुआ।

मामले की गंभीरता को भांपते ही, डॉ भरत गोस्वामी, कंसल्टेंट ऑर्थोपिडिक्स, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने एनेस्थीसिया टीम, जिसमें डॉ भूप सिंह, एडिशनल डायरेक्टर एनेस्थीसियोलॉजी, फोर्टिस ग्रेटर नोएडा और डॉ स्वयंभू शुभम, अटेंडिंग कंसल्टेंट, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, फोर्टिस ग्रेटर नोएडा शामिल थे, के साथ मिलकर तत्काल इमरजेंसी सर्जरी शुरू की। मरीज के दांए कूल्हे के जोड़ से करीब 200 मिली मवाद निकाला गया। लेकिन जंग में जीत अभी दूर थी।

इस सर्जरी के बाद, मरीज को पीआईसीयू में गहन चिकित्सा के लिए ले जाया गया। मरीज को अगले पांच दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और ब्लड प्रेशर तथा उनके फेफड़ों और सांस को स्थिर करने के लिए कई प्रकार की दवाएं दी गईं। पिडियाट्रिक और क्रिटिकल केयर टीमों ने गंभीर सेप्सिस और इंफेक्शन को दूर करने के लिए चौबीसों घंटे कड़ी मेहनत की।

आखिरकार 10 दिनों तक गहन निगरानी और उपचार के बाद, इस बच्चे की हालत धीरे-धीरे स्थिर होने लगी। उसे वेंटिलेटर से हटाने के बाद क्लीनिकल सुधार भी होने लगा। स्वास्थ्य लाभ और हालत स्थिर होने के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और एंटी-ट्यूबरक्युलर थेरेपी (एटीटी) के साथ-साथ एंटीबायोटिक एवं सपोर्टिव केयर की सलाह दी गई है।

इस मामले की और जानकारी देते हुए, डॉ कुशाग्र गुप्ता, कंसल्टेंट – पिडियाट्रिक्स, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने कहा, “बच्चों में बोन इंफेक्शन तेजी से बढ़ सकता है और यदि समय पर उपचार न किया जाए तो यह जीवनघाती भी होता है।

शुरूआत में ही पहचान करने, तत्काल सर्जिकल सहायता मिलने और इंटेंसिव केयर मैनेजमेंट में तालमेल के चलते इस बच्चे का जीवन बचाने में सफलता मिली। इस मामले ने एक बार फिर जटिल किस्म की पिडियाट्रिक इमरजेंसी से निपटने में मल्टीडिसीप्लीनरी टीमों के बीच आपसी तालमेल के महत्व को उजागर किया है।”

डॉ भरत गोस्वामी, कंसल्टेंट ऑर्थोपिडिक्स, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने कहा, ”हमें सर्जरी के दौरान जिस मात्रा में मवाद और इंफेक्शन दिखायी दिया उससे हमें अंदाजा हुआ कि मरीज का रोग किस हद तक आक्रामक हो चुका था। तत्काल मवाद निकालने और इंटेंसिव पोस्ट-ऑपरेटिव केयर ने इस बच्चे के जोड़ का स्थायी क्षरण होने और इंफेक्शन को घातक होने से रोक दिया।

इस मामले ने बच्चों में बोन इंफेक्शन का समय पर उपचार न करने के चलते उत्पन्न होने वाले खतरों की ओर इशारा किया है। बोन इंफेक्शन के चलते सेप्टिक आर्थराइटिस, ऑस्टियोमायलिटिस, सेप्टिक शॉक तथा कई बार दीर्घकालिक विकलांगता भी पैदा हो सकती है।

इलाज के बाद यह मरीज सुरक्षित तरीके से अपने घर लौट चुका है, धीरे-धीरे स्वास्थ्यलाभ कर रहा है – जो कि इस बात का प्रमाण है कि समय पर मेडिकल सहायता, एडवांस क्रिटिकल केयर और फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा में टीमों के बीच तालमेल ने उसकी रिकवरी में योगदान दिया।”

सिद्धार्थ निगम, फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने कहा, “इस मामले ने फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा के इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम्स और विभिन्न स्पेश्यलिटीज़ के बीच तालमेल को दर्शाया है। जब कोई बच्चा तेजी से बिगड़ती कंडीशन के साथ आता है, तो हमारी टीमें तत्काल, सटीकता और एक साझा उद्देश्य को ध्यान में रखकर काम में जुट जाती हैं।

इस कम उम्र के मरीज के गंभीर सेप्सिस के उपचार के लिए न सिर्फ क्लीनिकल विशेषज्ञता की आवश्यकता थी बल्कि एडवांस क्रिटिकल केयर इंफ्रास्ट्रक्चर और समन्वित टीमवर्क भी जरूरी था। हमें गर्व है कि समय पर हस्तक्षेप और चौबीसों घंटे समर्पण भाव से उपचार कर हम इस बच्चे को स्वस्थ जीवन जीने का एक नया अवसर देने में सक्षम हुए हैं। हमारे अस्पताल में आने वाले हर मरीज के लिए वर्ल्ड-क्लास और दयाभाव से भरपूर देखभाल की हमारी प्रतिबद्धता अटूट है।”

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9 वर्षीय बच्चा कूल्हे के गंभीर संक्रमण से 10 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद ठीक हुआ।
Kanchan Chaurasiya
Kanchan Chaurasiya

Kanchan Chaurasiya joined Medical Dialogues in 2025 as a Media and Marketing Coordinator. She holds a Bachelor's degree in Arts from Delhi University and has completed certifications in digital marketing. With a strong interest in health news, content creation, hospital updates, and emerging trends, Kanchan manages social media, news coverage, and public relations activities. She coordinates media outreach, creates press releases, promotes healthcare professionals and institutions, and supports health awareness campaigns to ensure accurate, engaging, and timely communication for the medical community and the public.