देश में कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों के इलाज को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में हाल के नीतिगत फैसले बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ऑन्कोलॉजिस्ट्स द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में बताया गया है कि जीवनरक्षक कैंसर दवाओं को जीएसटी से मुक्त करना और तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाना सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में प्रभावी कदम हैं।

अध्ययन के अनुसार, जीएसटी परिषद ने अपनी 56वीं बैठक में 33 जीवनरक्षक दवाओं को पूरी तरह जीएसटी से छूट देने की सिफारिश की थी। इन दवाओं में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई अहम दवाएं शामिल हैं, जिन पर पहले 12 प्रतिशत या 5 प्रतिशत तक जीएसटी लगाया जाता था। अब इन्हें शून्य कर श्रेणी में शामिल कर दिया गया है, जिससे मरीजों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हुआ है।

एम्स के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि इन फैसलों से इलाज की लागत घटने के साथ-साथ मरीजों का जेब से होने वाला खर्च भी कम हुआ है। इससे खासतौर पर मध्यम और कमजोर आर्थिक वर्ग के मरीजों को राहत मिली है, जो लंबे और महंगे इलाज के कारण गंभीर आर्थिक दबाव में आ जाते हैं।

इसके अलावा, हालिया बजट में सरकार द्वारा 17 कैंसर दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी घटाने के फैसले को भी अध्ययन में सकारात्मक बताया गया है। इससे आयातित दवाओं की कीमतें कम होने और इलाज को और अधिक सुलभ बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अध्ययन में तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने के फैसले को भी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद अहम बताया गया है। जीएसटी परिषद ने तंबाकू पर टैक्स स्लैब बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है, जो किसी भी उत्पाद श्रेणी में सबसे अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे तंबाकू का सेवन कम होगा, कैंसर जैसी बीमारियों की रोकथाम को बढ़ावा मिलेगा और समय से पहले होने वाली मौतों में कमी आएगी।

तंबाकू को दुनिया भर में कैंसर का सबसे बड़ा रोके जा सकने वाला कारण माना जाता है। अनुमान के मुताबिक, यह नए कैंसर मामलों के एक बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में तंबाकू पर ज्यादा कर लगाना न केवल लोगों को इसके सेवन से रोकता है, बल्कि इससे मिलने वाले राजस्व का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में भी किया जा सकता है।

अध्ययन में यह भी कहा गया है कि भारत द्वारा अपनाए गए ये नीतिगत बदलाव उन देशों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं, जहां सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां और रोगों का बोझ भारत जैसा ही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन सुधारों का लाभ समय पर मरीजों तक पहुंचाया जाए, तो यह कैंसर देखभाल को अधिक समान, न्यायसंगत और प्रभावी बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

With Inputs From IANS

IANSAIIMS StudyGST Relief

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एम्स अध्ययन: कैंसर दवाओं पर जीएसटी छूट और तंबाकू पर ज्यादा टैक्स से सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूती
Dr. Bhumika Maikhuri
Dr. Bhumika Maikhuri

Dr Bhumika Maikhuri is a Consultant Orthodontist at Sanjeevan Hospital, Delhi. She is also working as a Correspondent and a Medical Writer at Medical Dialogues. She completed her BDS from Dr D Y patil dental college and MDS from Kalinga institute of dental sciences. Apart from dentistry, she has a strong research and scientific writing acumen. At Medical Dialogues, She focusses on medical news, dental news, dental FAQ and medical writing etc.