वायु प्रदूषण और अल्जाइमर, क्या जहरीली हवा सीधे दिमाग पर हमला करती है? 2.7 करोड़ लोगों पर हुए शोध में बड़ा खुलासा

क्या वायु प्रदूषण सीधे अल्जाइमर (Alzheimer’s) का कारण बनता है, या यह पहले हमारे दिल और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है? अमेरिका में 2.78 करोड़ मेडिकेयर प्राप्तकर्ताओं पर किए गए एक विशाल स्टडी ने इसका चौंकाने वाला जवाब दिया है. यह दिमाग पर सीधा हमला (Direct Hit) है. एमोरी यूनिवर्सिटी (Emory University) के रिसर्चर ने पाया कि लंबे समय तक सूक्ष्म कणों (Fine Particulate Matter) के संपर्क में रहने से अल्जाइमर का खतरा काफी बढ़ जाता है. यह खतरा उच्च रक्तचाप (Hypertension) या अवसाद (Depression) जैसी अन्य बीमारियों से स्वतंत्र है.
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष: प्रदूषण और मस्तिष्क का संबंध
- सीधा प्रभाव (Direct Path)-वायु प्रदूषण अल्जाइमर में मुख्य रूप से सीधे तंत्रिका मार्गों (Neural Pathways) के माध्यम से योगदान देता है, न कि उच्च रक्तचाप जैसी माध्यमिक स्थितियों के कारण.
- विशाल पैमाना-इस शोध में 2000 से 2018 के बीच 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 2.78 करोड़ वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया गया.
- स्ट्रोक का खतरा (Stroke Vulnerability)-अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को पहले स्ट्रोक आ चुका है, वे प्रदूषण से होने वाले दिमागी नुकसान के प्रति अधिक संवेदनशील हैं. स्ट्रोक का इतिहास एक "मल्टीप्लायर" के रूप में काम करता है, जो दिमाग को विषाक्त कणों के प्रति और अधिक कमजोर बना देता है.
- सूक्ष्म कण (Fine Particulate Matter)-रिसर्चर का केंद्र वे सूक्ष्म कण थे जो शरीर के प्राकृतिक फिल्टर को पार कर सीधे रक्तप्रवाह या मस्तिष्क में प्रवेश कर सकते हैं.
पब्लिक हेल्थ के लिए नई चुनौती
अल्ज़ाइमर दुनिया भर में डिमेंशिया (Dementia) का सबसे सामान्य रूप है, जिससे लगभग 5.7 करोड़ लोग प्रभावित हैं. यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि हवा की गुणवत्ता में सुधार करना केवल जलवायु का मुद्दा नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर डिमेंशिया को रोकने की एक प्राथमिक रणनीति भी है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि उच्च रक्तचाप और अवसाद का प्रदूषण और अल्जाइमर के संबंध पर बहुत कम प्रभाव पड़ा, लेकिन स्ट्रोक से बचे लोगों के लिए यह स्थिति कहीं अधिक घातक है. यह पर्यावरण और संवहनी (Vascular) स्वास्थ्य जोखिमों के बीच एक खतरनाक मिलन को दर्शाता है.


