स्वास्थ्य के लिए खतरनाक गुस्सा, इन उपायों से करें कंट्रोल

नई दिल्ली: क्रोध मानव स्वभाव की एक स्वाभाविक भावना है, जो कई परिस्थितियों में व्यक्ति को साहस और प्रतिक्रिया देने की शक्ति प्रदान करती है। हालांकि, जब गुस्सा बार-बार या अनियंत्रित रूप से सामने आने लगता है, तो यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक गुस्से पर नियंत्रण न होने से उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, तनाव, चिंता और नींद से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में क्रोध को शरीर के दोषों, विशेष रूप से पित्त और कफ के असंतुलन से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि जब शरीर और मन का संतुलन बिगड़ता है, तो व्यक्ति अधिक चिड़चिड़ापन और आक्रामक व्यवहार का अनुभव करता है। इसलिए अचानक गुस्सा आने की स्थिति में तुरंत ऐसे उपाय अपनाना जरूरी है, जो मन और शरीर को शांत करने में मदद करें।
गुस्से के दौरान शरीर तनाव की स्थिति में पहुंच जाता है, जिससे हृदय गति तेज हो जाती है और मांसपेशियों में तनाव बढ़ने लगता है। ऐसे समय में सबसे प्रभावी तरीका है अपनी सांसों को नियंत्रित करना। आंखें बंद कर गहरी और धीमी सांस लेने से नर्वस सिस्टम शांत होता है।
विशेषज्ञ 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक अपनाने की सलाह देते हैं, जिसमें चार सेकंड तक सांस अंदर ली जाती है, सात सेकंड तक रोकी जाती है और आठ सेकंड में धीरे-धीरे बाहर छोड़ी जाती है। यह प्रक्रिया दिमाग को शांत कर भावनात्मक प्रतिक्रिया को कम करने में मदद करती है और सोचने-समझने की क्षमता को बेहतर बनाती है।
गुस्सा आने पर शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है, इसलिए धीरे-धीरे ठंडा पानी पीना लाभकारी माना जाता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ मानसिक तनाव को भी कम करता है। इसके अलावा, तुरंत प्रतिक्रिया देने या बहस में उलझने के बजाय कुछ समय के लिए उस स्थान से दूर हो जाना भी बेहद प्रभावी उपाय है। कुछ मिनटों का मौन व्यक्ति को स्थिति को समझने और संतुलित प्रतिक्रिया देने का अवसर देता है।
आयुर्वेद में मानसिक शांति के लिए तुलसी, अश्वगंधा और हल्दी जैसी औषधीय जड़ी-बूटियों के उपयोग की भी सलाह दी जाती है। तुलसी की चाय या हल्दी वाला दूध मन को शांत रखने में सहायक माना जाता है। साथ ही, नियमित योग, ध्यान और प्राणायाम—विशेष रूप से अनुलोम-विलोम और कपालभाति—नर्वस सिस्टम को संतुलित करने और गुस्से की तीव्रता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सकारात्मक सोच, संतुलित जीवनशैली और नियमित योग अभ्यास अपनाकर क्रोध को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे मानसिक शांति और बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है। (With inputs from IANS)


