केला vs मिल्कशेक, आपकी सेहत के लिए क्या है बेहतर? जानें साइंस की सच्चाई

अक्सर हम वर्कआउट के बाद या नाश्ते में 'बनाना मिल्कशेक' को एक हेल्दी ड्रिंक मानकर पीते हैंट. लेकिन आयुर्वेद और हालिया शोध कुछ और ही इशारा करते हैं. अकेला केला खाना और दूध के साथ उसे मिलाकर पीना आपकी सेहत पर क्या असर डालता है.
चूहों पर किया गया शोध और लीवर पर असर
एक अध्ययन में चूहों को लंबे समय तक दूध और केले का मिश्रण दिया गया। परिणाम चौंकाने वाले थे. मात्र 7 से 21 दिनों के भीतर उनके SGOT (लीवर स्ट्रेस) के स्तर में वृद्धि देखी गई. यूरिया का लेवल बढ़ गया और फैटी लीवर के लक्षण दिखाई दिए. तिल्ली (Spleen) में बदलाव और यहां तक कि दिल की मांसपेशियों में सूजन (Myocarditis) के संकेत भी मिले. चूंकि चूहों का पाचन तंत्र इंसानों से काफी मिलता-जुलता है, इसलिए यह शोध हमारे लिए भी चेतावनी है.
लार (Saliva) की भूमिका और पाचन प्रक्रिया
जब आप केला चबाकर खाते हैं, तो मुंह में पर्याप्त लार बनती है, जो पाचन और अवशोषण की प्रक्रिया में मदद करती है. इसके उल्टे, बनाना मिल्कशेक या स्मूदी एक Sluggish combination बन जाता है. जिससे पेट की अग्नि मंद हो जाती है. केला स्वभाव से चिपचिपा होता है और दूध भारी व ठंडा. यह मिश्रण पेट में 'अग्नि' (पाचन शक्ति) को कम कर देता है. इससे शरीर में बलगम (Mucus) अधिक बनता है, जिससे सर्दी, खांसी, साइनस और एलर्जी की समस्या हो सकती है.
दूध का फटना (Curdling Effect) और एसिड का मेल
दूध जब पेट में पहुंचता है, तो वह हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) के साथ प्रतिक्रिया कर अर्ध-ठोस अवस्था में बदल जाता है. यह प्रक्रिया दूध के प्रोटीन (लैक्टोज और कैसिइन) के धीरे-धीरे टूटने के लिए जरूरी है.
हालांकि, जब आप इसमें केला मिलाते हैं, तो केले में मौजूद मैलिक एसिड और साइट्रिक एसिड दूध के फटने की प्रक्रिया को बहुत तेज कर देते हैं. इससे दूध के प्रोटीन का सही तरह से अवशोषण और पाचन नहीं हो पाता, जिससे पेट में भारीपन महसूस होता है.
क्या है सही तरीका?
विशेषज्ञों का मानना है कि फल और दूध को एक साथ मिलाना पाचन तंत्र के लिए बोझ बन सकता है. भोजन के बाद केले को अच्छी तरह चबाकर खाएं. केला खाने के कम से कम 1 से 2 घंटे बाद एक गिलास दूध पिएं.


