एम्स दिल्ली का चमत्कार,2 साल तक पेशाब में खून आने को किया अनदेखा,नस तक फैला कैंसर; रोबोटिक सर्जरी से बची जान

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के डॉक्टरों ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण मामले में सफलता हासिल की है.दिल्ली के एक 48 वर्षीय व्यक्ति, जो दो साल तक पेशाब में खून आने (Hematouria) की समस्या को मामूली समझकर नजरअंदाज करते रहे, उनका रोबोटिक तकनीक के जरिए जटिल ऑपरेशन किया गया. यह मामला उन सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो दर्द रहित लक्षणों को हल्के में लेते हैं.
बीमारी की शुरुआत: एक जानलेवा अनदेखी
मरीज को पिछले दो साल से रुक-रुक कर पेशाब में खून आ रहा था. कोई दर्द, बुखार या वजन कम न होने के कारण उसे लगा कि समस्या गंभीर नहीं है. स्थानीय स्तर पर दवा लेने से खून आना बंद हो जाता था, जिससे उसे झूठा दिलासा मिलता रहा. लेकिन जब पिछले साल समस्या गंभीर हुई और पेशाब रुक गया, तब जांच में दाहिनी किडनी में 8-9 सेमी का एक बड़ा ट्यूमर पाया गया.
कैंसर की जटिलता: जब ट्यूमर मुख्य नस तक पहुंचा
जब तक मरीज को एम्स रेफर किया गया, कैंसर किडनी की सीमाओं को पार कर चुका था. यह किडनी की नस (Renal Vein) से होते हुए इन्फीरियर वेना कावा (IVC) तक पहुंच गया था. IVC शरीर की वह सबसे मुख्य नस है जो निचले हिस्से से अशुद्ध रक्त को वापस हृदय तक ले जाती है.
प्रोफेसर बी. नायक (यूरोलॉजी विभाग, एम्स) के अनुसार, लगभग 4-10 प्रतिशत किडनी कैंसर के मामलों में ट्यूमर नस के भीतर फैल जाता है. ऐसे मामलों में सर्जरी बेहद जोखिम भरी होती है क्योंकि डॉक्टर को शरीर की सबसे महत्वपूर्ण रक्त वाहिका के अंदर काम करना पड़ता है.
रोबोटिक सर्जरी: तकनीक ने दी नई जिंदगी
आमतौर पर इतने गंभीर मामलों में शरीर पर एक बड़ा चीरा लगाकर 'ओपन सर्जरी' की जाती है, लेकिन इस मरीज की शारीरिक स्थिति (पोलियो के कारण विकलांगता) को देखते हुए एम्स की टीम ने रोबोटिक दृष्टिकोण अपनाया.
रोबोटिक तकनीक की मदद से ट्यूमर और नस के अंदर जमा 'थ्रोम्बस' (ट्यूमर का हिस्सा) को बेहद सूक्ष्मता से निकाला गया. पारंपरिक सर्जरी की तुलना में इसमें बहुत छोटा छेद किया गया, जिससे मरीज का रक्तस्त्राव कम हुआ और रिकवरी तेज हुई. हिस्टोपैथोलॉजी ने पुष्टि की कि यह 'क्लियर सेल रीनल कार्सिनोमा' था। सर्जरी के तीन हफ्ते बाद मरीज अब स्वस्थ है.
डॉक्टरों का संदेश: लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अमलेश सेठ और उनकी टीम ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पेशाब में खून आना कभी भी सामान्य नहीं होता.भले ही इसमें दर्द न हो, यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इकलौता संकेत हो सकता है. समय पर निदान होने पर, एडवांस स्टेज में भी जीवित रहने की संभावना 50-70% तक हो सकती है.


